udte nahin the ped se jo teer dekhkar | उड़ते नहीं थे पेड़ से जो तीर देखकर

  - Lalit Pandey
उड़तेनहींथेपेड़सेजोतीरदेखकर
वोसबपरिंदेमरगएज़ंजीरदेखकर
इकदिनहमारेगाँवमेंइकसानिहाहुआ
सबलोगघरमेंछिपगएरहगीरदेखकर
जिसकीभीआँखलगगईहैसोचतेतुम्हें
वोसोरहाहैख़्वाबकीता'बीरदेखकर
मैंज़िंदगीकेसाथमुहब्बतमेंबदनसीब
ख़ुदकामलालकरताहूँतक़दीरदेखकर
पैकरबनातेवक़्तमुसव्विरबहकगए
सोकामलेरहाहूँमैंतस्वीरदेखकर
जबजबमैंसोचताहूँमुहब्बतभीछोड़दूँ
तबतबउमीदबढ़तीहैकश्मीरदेखकर
  - Lalit Pandey
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