zeest se ho ga.e bezaar koii baat nahin | ज़ीस्त से हो गए बेज़ार कोई बात नहीं

  - Lalit Pandey
ज़ीस्तसेहोगएबेज़ारकोईबातनहीं
ख़ुद-कुशीबैठीहैतैयारकोईबातनहीं
पीठपरवारहुआगरमिरीतोग़मकैसा
मैंनेभीमारीथीतलवारकोईबातनहीं
देरतकसब्ज़रहेंगेतोबिकेंगेभीज़रूर
अबतलकधीमाहैबाज़ारकोईबातनहीं
उसकाकोईभीनहींहाथपकड़नेवाला
बढ़गईइसलिएरफ़्तारकोईबातनहीं
मैंब-ज़ाहिरहूँकिमुझकोभीकोईचाहेगा
तुमनेगरकरदियाइंकारकोईबातनहीं
लोगआतेहैंमगरफिरसेबिछड़जातेहैं
गीतरहताहैपरफ़नकारकोईबातनहीं
हमपेगुज़रेजोकभीरंजतोहरबारकहा
होगयाछोड़ोचलोयारकोईबातनहीं
  - Lalit Pandey
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