ye waiz kaisi bahki bahki baatein ham se karte hain | ये वाइज़ कैसी बहकी बहकी बातें हम से करते हैं

  - Lala Madhav Ram Jauhar
येवाइज़कैसीबहकीबहकीबातेंहमसेकरतेहैं
कहींचढ़करशराब-ए-इश्क़केनश्शेउतरतेहैं
ख़ुदासमझेयेक्यासय्यादगुलचींज़ुल्मकरतेहैं
गुलोंकोतोड़तेहैंबुलबुलोंकेपरकतरतेहैं
दयादमनज़अमेंगोआपनेपररूहचलनिकली
किसीकेरोकनेसेजानेवालेकबठहरतेहैं
ज़रारहनेदोअपनेदरपेहमख़ाना-ब-दोशोंको
मुसाफ़िरजिसजगहआरामपातेहैंठहरतेहैं
जायाकरोअग़्यारकीउल्फ़तजतानेमें
वोतुमपरक्यूँँभलामरनेलगेफ़ाक़ोंसेमरतेहैं
हरइकमौसममेंकिश्त-ए-आरज़ूसरसब्ज़रहतीहै
तरद्दुदग़ैरकोहोगायहाँतोचैनकरतेहैं
येजोड़ाखोलनाभीहेचसेख़ालीनहींउनका
उलझजाताहैदिलजबबालशानोंपरबिखरतेहैं
समझलेनातुम्हारारक़ीबोकुछनहींमुश्किल
ख़ुदाजानेयेकिसकाख़ौफ़हैहमकिससेडरतेहैं
तकल्लुफ़केयेमअनीहैंसमझलोबे-कहेदिलकी
मज़ाक्याजबहमींनेयेकहातुमसेकिमरतेहैं
  - Lala Madhav Ram Jauhar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy