naubat-e-giriya o betaabi-o-zaari aayi | नौबत-ए-गिरिया ओ बेताबी-ओ-ज़ारी आई

  - Lala Madhav Ram Jauhar
नौबत-ए-गिरियाबेताबी-ओ-ज़ारीआई
बड़ेहंगा
मेंसेकलयादतुम्हारीआई
नज़अमेंभीवोयहाँतकनहींआनेदेता
ख़ुदाग़ैरकोजाएहमारीआई
उनकोतश्बीहमसीहासेजोदीवोबोले
आजमालूमहुआमौततुम्हारीआई
किसतरफ़आएकिधरभूलपड़ेख़ैरतोहै
आजक्याथाजोतुम्हेंयादहमारीआई
नाला-ए-बुलबुल-ए-शैदातोसुनाहँसहँसकर
अबजिगरथामकेबैठोमिरीबारीआई
  - Lala Madhav Ram Jauhar
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