boo-e-gul soongh kar bigadte hain | बू-ए-गुल सूँघ कर बिगड़ते हैं

  - Lala Madhav Ram Jauhar
बू-ए-गुलसूँघकरबिगड़तेहैं
येपरी-रूहवासेलड़तेहैं
क्यूँँजवानीकेपीछेपड़तेहैं
भागतेकोनहींपकड़तेहैं
एकदिनवोज़मीनदेखेंगे
फ़लकआजकोअकड़तेहैं
मलरहेहैंवोअपनेघरमेहंदी
हमयहाँएड़ियाँरगड़तेहैं
नामा-बरना-उमीदआताहै
हाएक्यासुस्तपाँवपड़तेहैं
जिसकेहैंउसकेहैंहमजौहर
यारबनकरकहींबिगड़तेहैं
  - Lala Madhav Ram Jauhar
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