कैसाहीदोस्तहोनकहेराज़-ए-दिलकोई
निकलीजोबातमुँहसेतोफैलीजहानमें
सचसचकहोयेबातबनानानहींपसंद
क्याकहरहेथेग़ैरअभीचुपकेसेकानमें
पूछाहैहाल-ए-ज़ारतोसुनलोख़ता-मुआफ़
कुछबातमेरेहोंटोंमेंहैकुछज़बानमें
आशिक़सेपूछिएनसर-ए-बज़्महाल-ए-दिल
पर्देकीबातसुनतेहैंचुपकेसेकानमें
फ़ुर्क़तमेंक्याबताऊँकिदिनहैकिरातहै
आँखोंकोसूझतानहींरोनेकेध्यानमें
क़स्र-ए-जहाँहैतेरेफ़क़ीरोंकाझोंपड़ा
महलोंसेबढ़केचैनहैअपनेमकानमें
दोदिनकीज़िंदगीमेंजोचाहेकोईकरे
रहजातीहैभलाईबुराईजहानमें