ham na chhodenge mohabbat tiri ai zulf-e-siyaah | हम न छोड़ेंगे मोहब्बत तिरी ऐ ज़ुल्फ़-ए-सियाह

  - Lala Madhav Ram Jauhar
हमछोड़ेंगेमोहब्बततिरीज़ुल्फ़-ए-सियाह
सरचढ़ायाहैतूक्यादिलसेगिराएँतुझको
छोड़करहमकोमिलाशम्अ-रुख़ोंसेजाकर
इसीक़ाबिलहैतूदिलकिजलाएँतुझको
दर्द-ए-दिलकहतेहुएबज़्ममेंआताहैहिजाब
तख़लियाहोतोकुछअहवालसुनाएँतुझको
अपनेमाशूक़कीसुनताहैबुराईकोई
क्यूँँहमबिगड़ेंजोअग़्यारबनाएँतुझको
रूठताहूँजोकभीमैंतोयेकहताहैवोशोख़
क्याग़रज़हमकोपड़ीहैजोमनाएँतुझको
तूनेअग़्यारसेआईनामँगाकरदेखा
दिलमेंआताहैकिअबमुँहदिखाएँतुझको
  - Lala Madhav Ram Jauhar
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