umr-bhar khwaab-e-mohabbat se na bedaar hue | उम्र-भर ख़्वाब-ए-मोहब्बत से न बेदार हुए

  - Lais Quraishi
उम्र-भरख़्वाब-ए-मोहब्बतसेबेदारहुए
इसीकिरदारसेहमसाहब-ए-किरदारहुए
कभीकाँटोंकीजराहतसेभीआराममिला
लाला-ओ-गुलभीकभीबाइस-ए-आज़ारहुए
आदमियतकेख़द-ओ-ख़ालकोज़ीनतमिली
सारेआईनफ़क़तनक़्श-ब-दीवारहुए
हाएवोहुस्नकिसीनेभीदेखाजिसको
हाएवोराज़जोरुस्वासर-ए-बाज़ारहुए
कितनेदुश्मनथेज़मानेमेंहमारेलेकिन
अपनीहीहस्तीसेहमबरसर-ए-पैकारहुए
दोस्तोएकतुम्हारीभीरिया-कारीसे
हमकोहोनाथाख़बर-दारख़बर-दारहुए
नौहा-ए-ज़ातकायेभीतोइकअंदाज़हुआ
अश्कआँखोंमेंनहींआएतोअशआ'रहुए
बातकुछयूँँहैकिहिम्मतहीहारीहमने
मेरेपिंदार-ए-ख़ुदीपरतोबहुतवारहुए
रंग-ओ-बूपाँवकीज़ंजीरहुएजातेहैं
जानसीम-ए-सहरीहमतोगिरफ़्तारहुए
हमकिसर-गर्म-ए-सफ़रथेरहेसर-गर्म-ए-सफ़र
मरहलेतोकभीआसाँकभीदुश्वारहुए
अबतोना-क़द्री-ए-अर्बाब-ए-हुनरहै'लैस'
आपक्यासोचकेइसअहदमेंफ़नकारहुए
  - Lais Quraishi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy