ahl-e-jahaan ke saath vafaa ya jafaa karoon | अहल-ए-जहाँ के साथ वफ़ा या जफ़ा करूँँ

  - Lais Quraishi
अहल-ए-जहाँकेसाथवफ़ायाजफ़ाकरूँँ
मेरीसमझमेंकुछनहींआताहैक्याकरूँँ
येदर्द-ए-दिलतोहासिल-ए-उम्र-दराज़है
मैंइसकोअपनीज़ातसेक्यूँँकरजुदाकरूँँ
दुनियायहीकरेगीतोदुनियासेपेशतर
मजरूहक्यूँँख़ुदहीमैंअपनीअनाकरूँँ
दुनियामेंकौनहैजोनहींहैमिरेख़िलाफ़
इकतुमहीरहगएहोतुम्हेंभीख़फ़ाकरूँँ
हरज़ाविएसेज़ीस्तनेरुस्वाकियामुझे
किसरुख़सेअपनीज़ातकाअबसामनाकरूँँ
एहसानजोउठाएहैंऔरोंकेवास्ते
औरोंपेहैंवोक़र्ज़मगरमैंअदाकरूँँ
आँखोंकोनींदकीभीरिफ़ाक़तनहींनसीब
मैंशम्अ'तोनहींकिसहरतकजलाकरूँँ
हसरतहीरहगईकिबहारोंकेदरमियाँ
तेरेबग़ैरभीतोकभीख़ुशरहाकरूँँ
बेगानगीकोछोड़केफ़ितरतभीहँसपड़े
आदमकेनामपरकोईऐसीख़ताकरूँँ
जबकर्ब-ए-आगहीमेंहूँ'लैस'आज-कल
इसकर्ब-ए-आगहीसेकिसेआश्नाकरूँँ
  - Lais Quraishi
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