sukoot-e-lab ko mire arz-e-haal hi samjho | सुकूत-ए-लब को मिरे अर्ज़-ए-हाल ही समझो

  - Lais Quraishi
सुकूत-ए-लबकोमिरेअर्ज़-ए-हालहीसमझो
मिरीअना-ए-ख़फ़ीकोसवालहीसमझो
वोरू-ब-रूहैंमिरेदिलमगरयेकहताहै
ख़याल-ए-हुस्नकोहुस्न-ए-ख़यालहीसमझो
रफ़ाक़तोंकेक़रीनेबदलतेरहतेहैं
सोकर्ब-ए-हिज्रकोलुत्फ़-ए-विसालहीसमझो
तड़परहेहैंजोयूँँहमसदा-ए-साज़केसाथ
उसेकुछऔरनहींवज्द-ओ-हालहीसमझो
मिरेहुनरकोरहाबज़्म-ए-कम-नज़रसेगुरेज़
उसेभीमेरेहुनरकाकमालहीसमझो
हवा-ए-सुब्ह-ए-चमनऔरएकबारअगर
गुज़रगईतोहमेंपाएमालहीसमझो
दिलोंकेज़ख़्मछुपेहैंलहूकीचादरमें
तुम्हेंग़रज़नहींतुमइंदिमालहीसमझो
हुसूल-ए-कैफ़कोमय-ख़ाना-ए-हयातमें'लैस'
शिकस्त-ए-जामसेपहलेमुहालहीसमझो
  - Lais Quraishi
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