koi payaam-e-musalsal hai shor-e-dariya bhi | कोई पयाम-ए-मुसलसल है शोर-ए-दरिया भी

  - Lais Quraishi
कोईपयाम-ए-मुसलसलहैशोर-ए-दरियाभी
तही-सुख़नसेनहींहैसुकूत-ए-सहराभी
फ़ज़ा-ए-दश्तमेंअहल-ए-जुनूँकेहंगा
में
हमेंतोरासआईमगरयेदुनियाभी
ज़मीन-ए-तिश्ना-ए-दहनकीसदातोआईथी
मगरयेबातकिअब्र-ए-बहारबरसाभी
येबू-ए-गुलभीपरेशाँबहुतहुईलेकिन
बहुतहुआमिरीआवारगीकाचर्चाभी
कियाहैफ़त्हकोईलम्हा-ए-वफ़ाजबसे
मिरीगिरफ़्तमेंइमरोज़भीहैफ़र्दाभी
अभीतोतिश्ना-लबीकेसुरूरमेंगुमहैं
हमअहल-ए-ज़र्फ़करेंगेकभीतक़ाज़ाभी
जहाँकोदेखनेवालीहज़ारआँखेंहैं
इन्हींमेंहोगीकहींकोईचश्म-ए-बीनाभी
जोबे-हुनरहैंवोशाइस्ता-ए-गुनाहनहीं
गुनाहकरनेमेंइकशर्तहैसलीक़ाभी
अजीबआलम-ए-बेगांगीमेंनिकले
गराँगुज़रतीहैदिलपरतिरीतमन्नाभी
जोमिलरहाथाब-ज़ाहिरबड़ेख़ुलूसकेसाथ
जनाब-ए-'लैस'नेउसआदमीकोसमझाभी
  - Lais Quraishi
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