manaazir-e-shab-e-rafta khayal-o-khwaab hue | मनाज़िर-ए-शब-ए-रफ़्ता ख़याल-ओ-ख़्वाब हुए

  - Lais Quraishi
मनाज़िर-ए-शब-ए-रफ़्ताख़याल-ओ-ख़्वाबहुए
वोअश्कथेकिसितारेसभीख़राबहुए
वोना-ख़ुदाकिख़ुदाईकाजिनकोदा'वाथा
सफ़ीनेउनकीहिमाक़तसेज़ेर-ए-आबहुए
हमअहल-ए-दर्दज़मानेकेहाथक्याआते
किहमतोअपनेलिएभीदस्तियाबहुए
तलाश-ए-जाम-ए-तरबमेंकहाँकहाँगए
पिएबग़ैरभीहमतोबहुतख़राबहुए
हमउनकेऐबकोक्याऔरक्यूँँअयाँकरते
जोबे-ज़मीरथेवोख़ुदहीबे-नक़ाबहुए
फ़रेबहीसेनवाज़ाहैउनरफ़ीक़ोंने
मिरीजनाबमेंकरजोबारयाबहुए
तमामउम्रमज़ाक़-ए-जुनूँजोरखतेथे
रह-ए-ख़िरदमेंवहीलोगकामयाबहुए
हमारासब्रहैबे-इंतिहातोहैरतक्या
कि'लैस'हमपेसितमभीतोबे-हिसाबहुए
  - Lais Quraishi
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