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Kiran K
hai tere qurb ki KHushboo badan se rooh talak
hai tere qurb ki KHushboo badan se rooh talak | है तेरे क़ुर्ब की ख़ुशबू बदन से रूह तलक
- Kiran K
है
तेरे
क़ुर्ब
की
ख़ुशबू
बदन
से
रूह
तलक
तेरे
ख़याल
से
महकी
है
ज़िन्दगी
मेरी
- Kiran K
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गँवाई
किस
की
तमन्ना
में
ज़िंदगी
मैं
ने
वो
कौन
है
जिसे
देखा
नहीं
कभी
मैं
ने
Jaun Elia
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हम
भी
क्या
ज़िंदगी
गुज़ार
गए
दिल
की
बाज़ी
लगा
के
हार
गए
Dagh Dehlvi
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क्यूँ
डरें
ज़िन्दगी
में
क्या
होगा
कुछ
न
होगा
तो
तजरबा
होगा
Javed Akhtar
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ज़िंदगी
मेरी
मुझे
क़ैद
किए
देती
है
इस
को
डर
है
मैं
किसी
और
का
हो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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तेरे
बग़ैर
भी
तो
ग़नीमत
है
ज़िंदगी
ख़ुद
को
गँवा
के
कौन
तेरी
जुस्तुजू
करे
Ahmad Faraz
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बता
रहा
है
झटकना
तेरी
कलाई
का
ज़रा
भी
रंज
नहीं
है
तुझे
जुदाई
का
मैं
ज़िंदगी
को
खुले
दिल
से
खर्च
करता
था
हिसाब
देना
पड़ा
मुझको
पाई-पाई
का
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Azhar Faragh
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यूँँ
ज़िंदगी
गुज़ार
रहा
हूँ
तिरे
बग़ैर
जैसे
कोई
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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हमको
ख़त
उनके
मिल
रहे
हैं
अब
हर
तरफ़
फूल
खिल
रहे
हैं
अब
हम
बुलन्दी
पे
ख़ुद
को
ले
आए
लोग
झुक
झुक
के
मिल
रहे
हैं
अब
गुल
कभी
ख़्वाब
में
दिखा
था
इक
ज़ख़्म
पलकों
पे
खिल
रहे
हैं
अब
जब
'किरण'
बात
हक़
की
आई
तो
लोग
होंटों
को
सिल
रहे
हैं
अब
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Kiran K
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ग़ज़ल
मेरी
ये
किसने
ज़ख़्म
पर
बाँधी
है
अपने
मेरे
अलफ़ाज़
किसके
वास्ते
मरहम
हुए
हैं
Kiran K
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बाद
मुद्दत
के
तस्वीर
तेरी
मिली
ज़ख़्म
यादों
के
फिर
से
महकने
लगे
Kiran K
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न
जाने
कब
से
सहरा
था
मेरे
दिल
का
जज़ीरा
तेरे
बस
एक
गुल
ने
कर
दिया
गुलज़ार
इसको
Kiran K
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ये
कैसी
इश्तियाक़-ए-दीद
है
मेरी
निग़ाहों
की
उन्हें
ही
देखना
चाहें,
झुकें
भी
सामने
उनके
Kiran K
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