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Kiran K
baad muddat ke tasveer teri mili
baad muddat ke tasveer teri mili | बाद मुद्दत के तस्वीर तेरी मिली
- Kiran K
बाद
मुद्दत
के
तस्वीर
तेरी
मिली
ज़ख़्म
यादों
के
फिर
से
महकने
लगे
- Kiran K
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
रूठ
के
जाने
वाले
मैं
अभी
तक
तिरी
तस्वीर
लिए
बैठा
हूँ
Qaisar-ul-Jafri
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तेरा
चेहरा
सुब्ह
का
तारा
लगता
है
सुब्ह
का
तारा
कितना
प्यारा
लगता
है
तुम
से
मिल
कर
इमली
मीठी
लगती
है
तुम
से
बिछड़
कर
शहद
भी
खारा
लगता
है
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Kaif Bhopali
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देख
कर
उसको
दिन
गुज़रते
हैं
एक
तस्वीर
जिस
में
साथ
हैं
हम
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Gopesh "Tanha"
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इक
गुल
के
मुरझाने
पर
क्या
गुलशन
में
कोहराम
मचा
इक
चेहरा
कुम्हला
जाने
से
कितने
दिल
नाशाद
हुए
Faiz Ahmad Faiz
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ग़म
में
हम
सूरत-ए-गमख़ार
नहीं
पढ़ते
हैं
इसलिए
मीर
के
अश'आर
नहीं
पढ़ते
हैं
मेरी
आँखें
तेरी
तस्वीर
से
जा
लगती
हैं
सुब्ह
उठकर
सभी
अख़बार
नहीं
पढ़ते
हैं
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Ashu Mishra
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तिरे
जमाल
की
तस्वीर
खींच
दूँ
लेकिन
ज़बाँ
में
आँख
नहीं
आँख
में
ज़बान
नहीं
Jigar Moradabadi
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हसीं
ख़्वाबों
को
अपने
साथ
में
ढोती
हुई
आंँखे
बहुत
प्यारी
लगी
हमको
तेरी
सोती
हुई
आंँखे
मोहब्बत
में
ये
दो
क़िस्से
सुना
है
रोज़
होते
हैं
कभी
हँसता
हुआ
चेहरा
कभी
रोती
हुई
आंँखे
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Naimish trivedi
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चेहरा
देखें
तेरे
होंट
और
पलकें
देखें
दिल
पे
आँखें
रक्खें
तेरी
साँसें
देखें
Tehzeeb Hafi
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पड़
गया
महँगा
तेरी
फोटो
हटाना
पर्स
का
हर
नोट
जाली
हो
गया
है
Harsh saxena
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कोई
चेहरा
किसी
को
उम्र
भर
अच्छा
नहीं
लगता
हसीं
है
चाँद
भी,
शब
भर
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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उलझ
जाती
हूँ
अक्सर
आईने
से
मैं
तक़ाबुल
में
जो
ख़ुद
को
देखती
हूँ
अक्स
तेरा
ही
उभरता
है
Kiran K
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उर्दू
ज़बान
यूँँ
कि
घुले
चाशनी
कोई
बातें
हैं
जाँ-फ़ज़ा-ए-बहारान
आपकी
Kiran K
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न
जाने
कब
से
सहरा
था
मेरे
दिल
का
जज़ीरा
तेरे
बस
एक
गुल
ने
कर
दिया
गुलज़ार
इसको
Kiran K
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ग़ज़ल
मेरी
ये
किसने
ज़ख़्म
पर
बाँधी
है
अपने
मेरे
अलफ़ाज़
किसके
वास्ते
मरहम
हुए
हैं
Kiran K
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मुंतज़िर
थी
एक
अरसे
से
वो
मेरे
वास्ते
देखते
ही
मौत
ने
बाहों
में
मुझको
भर
लिया
Kiran K
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