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Kiran K
ghazal meri ye kisne zakham par baandhi hai apne
ghazal meri ye kisne zakham par baandhi hai apne | ग़ज़ल मेरी ये किसने ज़ख़्म पर बाँधी है अपने
- Kiran K
ग़ज़ल
मेरी
ये
किसने
ज़ख़्म
पर
बाँधी
है
अपने
मेरे
अलफ़ाज़
किसके
वास्ते
मरहम
हुए
हैं
- Kiran K
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दुश्मनी
लाख
सही
ख़त्म
न
कीजे
रिश्ता
दिल
मिले
या
न
मिले
हाथ
मिलाते
रहिए
Nida Fazli
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जीत
भी
लूँ
गर
लड़ाई
तुम
से
मैं
तो
क्या
मिलेगा
हाथ
में
दोनों
के
बस
इक
टूटा
सा
रिश्ता
मिलेगा
कर
के
लाखों
कोशिशें
गर
जो
बचा
भी
लूँ
मैं
रिश्ता
तो
नहीं
फिर
मन
हमारा
पहले
के
जैसा
मिलेगा
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Ankit Maurya
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लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
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बाक़ी
नहीं
रहा
है
कोई
रब्त
शहरस
यानी
कि
ख़ुश
रहेंगे
यहाँ
ख़ुश
रहे
बग़ैर
pankaj pundir
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ऐसी
हैं
क़ुर्बतें
के
मुझी
में
बसा
है
वो
ऐसे
हैं
फ़ासले
के
नहीं
राब्ता
नसीब
Afzal Ali Afzal
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पैसा
कमाने
आते
हैं
सब
राजनीति
में
आता
नहीं
है
कोई
भी
खोने
के
वास्ते
छम्मो
का
मुजरा
सुनते
हैं
नेता
जो
रात
भर
संसद
भवन
में
आते
हैं
सोने
के
वास्ते
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Paplu Lucknawi
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जिस
लब
के
ग़ैर
बोसे
लें
उस
लब
से
'शेफ़्ता'
कम्बख़्त
गालियाँ
भी
नहीं
मेरे
वास्ते
Mustafa Khan Shefta
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उसके
बदन
को
दी
नुमूद
हमने
सुखन
में
और
फिर
उसके
बदन
के
वास्ते
इक
क़बा़
भी
सी
गई
Jaun Elia
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कौन
सी
दीवार
है
मौजूद
इस
रिश्ते
में
'साज़'
क्यूँँ
नहीं
रो
सकते
हम
अपने
पिता
के
सामने
Siddharth Saaz
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हम
मुहब्बत
में
किसी
के
वास्ते
जी
नहीं
सकते
तो
मर
तो
सकते
हैं
Sunny Seher
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लिख
दिया
था
जिल्द
पर
ईसा
का
नाम
साँस
लेने
लग
गए
औराक़
सब
Kiran K
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ये
शाम
ख़ुशबू
पहन
के
तेरी
ढली
है
मुझ
में
जो
रेज़ा
रेज़ा
मैं
क़तरा
क़तरा
पिघल
रही
हूँ
ख़मोश
शब
के
समुंदरों
में
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Kiran K
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बिखेरे
हैं
हर
एक
जानिब
शज़र
अपनी
उदासी
को
कि
ये
सूखे
हुए
पत्ते
कहानी
कह
रहे
हैं
कुछ
Kiran K
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है
तेरे
क़ुर्ब
की
ख़ुशबू
बदन
से
रूह
तलक
तेरे
ख़याल
से
महकी
है
ज़िन्दगी
मेरी
Kiran K
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रौशनी
कमरे
में
मेरे
देर
तक
ठहरी
रही
जब
उठी
मिज़गाँ
तो
इक
सूरज
मेरे
पहलू
में
था
Kiran K
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