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Kiran K
bikhere hain har ek jaanib shazr apni udaasi ko
bikhere hain har ek jaanib shazr apni udaasi ko | बिखेरे हैं हर एक जानिब शज़र अपनी उदासी को
- Kiran K
बिखेरे
हैं
हर
एक
जानिब
शज़र
अपनी
उदासी
को
कि
ये
सूखे
हुए
पत्ते
कहानी
कह
रहे
हैं
कुछ
- Kiran K
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शाम
भी
थी
धुआँ
धुआँ
हुस्न
भी
था
उदास
उदास
दिल
को
कई
कहानियाँ
याद
सी
आ
के
रह
गईं
Firaq Gorakhpuri
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लाज़िम
है
अब
कि
आप
ज़ियादा
उदास
हों
इस
शहर
में
बचे
हैं
बहुत
कम
उदास
लोग
Bhaskar Shukla
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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सभी
के
साथ
दिखना
भी
मगर
सब
सेे
जुदा
रहना
भी
है
उसको
उदासी
साथ
भी
रखनी
है
और
तस्वीर
में
हँसना
भी
है
उसको
Kafeel Rana
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एक
दुख
ये
के
तू
मिलने
नहीं
आया
मुझ
सेे
एक
दुख
ये
के
उस
दिन
मेरा
घर
ख़ाली
था
Tehzeeb Hafi
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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रूमाल
ले
लिया
है
किसी
माह-जबीन
से
कब
तक
पसीना
पोंछते
हम
आस्तीन
से
ये
आँसुओं
के
दाग़
हैं,
आँसू
ही
धोएँगे
ये
दाग़
धुल
न
पाएँगे
वाशिंग
मशीन
से
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Waseem Nadir
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पहले
ये
काम
बड़े
प्यार
से
माँ
करती
थी
अब
हमें
धूप
जगाती
है
तो
दुख
होता
है
Munawwar Rana
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ईद
ख़ुशियों
का
दिन
सही
लेकिन
इक
उदासी
भी
साथ
लाती
है
ज़ख़्म
उभरते
हैं
जाने
कब
कब
के
जाने
किस
किस
की
याद
आती
है
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Farhat Ehsaas
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हमको
ख़त
उनके
मिल
रहे
हैं
अब
हर
तरफ़
फूल
खिल
रहे
हैं
अब
हम
बुलन्दी
पे
ख़ुद
को
ले
आए
लोग
झुक
झुक
के
मिल
रहे
हैं
अब
गुल
कभी
ख़्वाब
में
दिखा
था
इक
ज़ख़्म
पलकों
पे
खिल
रहे
हैं
अब
जब
'किरण'
बात
हक़
की
आई
तो
लोग
होंटों
को
सिल
रहे
हैं
अब
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Kiran K
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कैसे
कहूँ
दुनिया
है
ये
इंसानों
की
इंसानियत
रुस्वा
है
जब
हर
सूँ
यहाँ
Kiran K
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चला
दूँ
इक
मुक़दमा
गर
कहीं
मिल
जाए
फिर
से
कि
मेरा
क़त्ल
करके
लापता
है
ज़िंदगानी
Kiran K
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इश्क़
तेरा
हो
भले
औहाम
ही
साँस
लेने
की
हसीं
इक
वज्ह
है
Kiran K
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खिल
रहे
हैं
आजकल
जो
मेरी
पलकों
पर
नींद
उन
ख़्वाबों
में
ही
बिखरी
पड़ी
होगी
Kiran K
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