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Kiran K
hamko khat unke mil rahe hain ab
hamko khat unke mil rahe hain ab | हमको ख़त उनके मिल रहे हैं अब
- Kiran K
हमको
ख़त
उनके
मिल
रहे
हैं
अब
हर
तरफ़
फूल
खिल
रहे
हैं
अब
हम
बुलन्दी
पे
ख़ुद
को
ले
आए
लोग
झुक
झुक
के
मिल
रहे
हैं
अब
गुल
कभी
ख़्वाब
में
दिखा
था
इक
ज़ख़्म
पलकों
पे
खिल
रहे
हैं
अब
जब
'किरण'
बात
हक़
की
आई
तो
लोग
होंटों
को
सिल
रहे
हैं
अब
- Kiran K
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तमाम
बातें
जो
चाहता
था
मैं
तुम
सेे
कहना
वो
एक
काग़ज़
पे
लिख
के
काग़ज़
जला
दिया
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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जिस
की
बातों
के
फ़साने
लिक्खे
उस
ने
तो
कुछ
न
कहा
था
शायद
Ada Jafarey
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तन्हा
होना,
गुमसुम
दिखना,
कुछ
ना
कहना...
ठीक
नहीं
अपने
ग़म
को
इतना
सहना,
इतना
सहना...
ठीक
नहीं
आओ
दिल
की
मिट्टी
में
कुछ
दिल
की
बातें
बो
दें
हम
बारिश
के
मौसम
में
गमले
ख़ाली
रहना...
ठीक
नहीं
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Dev Niranjan
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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कुछ
बात
है
कि
हस्ती
मिटती
नहीं
हमारी
सदियों
रहा
है
दुश्मन
दौर-ए-ज़माँ
हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें
ये
किसने
कहा
रब
को
नहीं
मानता
मैं
ये
और
बात
कि
मज़हब
को
नहीं
मानता
मैं
Bhaskar Shukla
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फिर
आज
यारों
ने
तुम्हारी
बात
की
फिर
यार
महफ़िल
में
मिरी
खिल्ली
उड़ी
Harsh saxena
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ज़रा
सा
झूठ
ही
कह
दो
मेरे
बिन
तुम
अधूरे
हो
तुम्हारा
क्या
बिगड़ता
है
ज़रा
सी
बात
कहने
में
Parveen Shakir
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होंटों
पर
इक
बार
सजा
कर
अपने
होंट
उस
के
बाद
न
बातें
करना
सो
जाना
Ateeq Allahabadi
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तुझे
न
आएँगी
मुफ़्लिस
की
मुश्किलात
समझ
मैं
छोटे
लोगों
के
घर
का
बड़ा
हूॅं
बात
समझ
Umair Najmi
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चाहते
थे
टूटकर
जिनको
कभी
देखकर
यकजा
वो
हैरां
है
हमें
Kiran K
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बाद
मुद्दत
के
तस्वीर
तेरी
मिली
ज़ख़्म
यादों
के
फिर
से
महकने
लगे
Kiran K
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छुआ
था
नाम
कभी
मेरी
क़लम
ने
उसका
तभी
से
मीरा
बनी
लिख
रही
है
बस
उसको
Kiran K
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मिटी
जा
रही
है
ये
दुनिया
मुसलसल
ये
ऐसी
वबा
है
दवा-साज़
तू
क्यूँ
बनाता
नहीं
है
दवा-ए-उदासी
Kiran K
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सुब्ह
की
पहली
अज़ाँ
में
सुन
रही
हूँ
नाम
तेरा
आजकल
मैं
मंदिरों
की
घण्टियाँ
भी
कब
भला
इतनी
मधुर
लगती
थीं
मुझको
Kiran K
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