apna hota na kisi chashm-e-digar men rehta | अपना होता न किसी चश्म-ए-दिगर में रहता

  - Khurram Afaq
अपनाहोताकिसीचश्म-ए-दिगरमेंरहता
औरकुछरोज़जोमैंतेरीनज़रमेंरहता
फ़ासलादेखज़रारिज़्क़-ओ-मोहब्बतकेबीच
औरख़ुदसोचकिकबतकमैंसफ़रमेंरहता
कोईअपनोंकेअलावाभीनिभातामिरासाथ
कोईलहरोंकेअलावाभीभँवरमेंरहता
अपनीउम्मीदतोसरहदपेहीदमतोड़गई
अबवोईरानमेंरहताकिक़तरमेंरहता
उसकेजातेहीमोहब्बतकोनिकालादिलसे
वर्नायेसाँपबहुतदेरखंडरमेंरहता
  - Khurram Afaq
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