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Khurram Afaq
thoda sa israar karen to itni mohabbat mil jaati hai
thoda sa israar karen to itni mohabbat mil jaati hai | थोड़ा सा इसरार करें तो इतनी मोहब्बत मिल जाती है
- Khurram Afaq
थोड़ा
सा
इसरार
करें
तो
इतनी
मोहब्बत
मिल
जाती
है
अब
भी
उसको
देखने
और
छूने
की
इजाज़त
मिल
जाती
है
दस
सालों
से
पड़े
हुए
हैं
हम
बेहाल
तेरे
दिल
में
इतने
में
तो
ग़ैर-मुमालिक
की
शहरियत
मिल
जाती
है
इश्क़
अगर
हम
सेाए
में
हो
जाए
तो
ये
फ़ाइदा
है
दिल
से
दिल
मिल
जाता
है
और
छत
से
छत
मिल
जाती
है
- Khurram Afaq
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मोहब्बत
में
नहीं
है
फ़र्क़
जीने
और
मरने
का
उसी
को
देख
कर
जीते
हैं
जिस
काफ़िर
पे
दम
निकले
Mirza Ghalib
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किसे
है
वक़्त
मोहब्बत
में
दर-ब-दर
भटके
मैं
उसके
शहर
गया
था
किसी
ज़रूरत
से
Riyaz Tariq
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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पलट
कर
लौट
आने
में
मज़ा
भी
है
मुहब्बत
भी
बुलाकर
देख
लो
शायद
पलट
कर
लौट
आएँ
हम
Gaurav Singh
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ये
इश्क़
भी
मुझे
लगता
है
बेटियों
की
तरह
जो
माँगता
है
अमूमन
उसे
नहीं
मिलता
Dipendra Singh 'Raaz'
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अदावत
मुहब्बत
रफ़ाक़त
नहीं
है
हमें
तुम
सेे
कोई
शिकायत
नहीं
है
दिलों
को
लगाने
लगे
हो
जहाँँ
तुम
वहाँ
तो
किसी
को
मुहब्बत
नहीं
है
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Tiwari Jitendra
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तुम्हीं
से
प्यार
मुझको
इसलिए
है
ज़माना
आज़मा
कर
आ
गया
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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अवल्ली
इश्क़
के
एहसास
भी
तारी
रक्खे
और
इस
बीच
नए
काम
भी
जारी
रक्खे
मैंने
दिल
रख
लिया
है
ये
भी
कोई
कम
तो
नहीं
दूसरा
ढूँढ़
लो
जो
बात
तुम्हारी
रक्खे
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Ashu Mishra
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दूजा
इश्क़
किया
तो
ये
मालूम
हुआ
पहले
वाले
में
भी
ग़लती
मेरी
थी
Tanoj Dadhich
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कभी
कभी
तो
झगड़ने
का
जी
भी
चाहेगा
मगर
ये
जंग
मोहब्बत
से
जीती
जाएगी
Amaan Abbas Naqvi
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बड़ी
मुश्किल
से
नीचे
बैठते
हैं
जो
तेरे
साथ
उठते
बैठते
हैं
Khurram Afaq
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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अब
ऐसे
ज़ाविए
पर
लौ
रखी
जाने
लगी
है
चराग़ों
के
तले
भी
रोशनी
जाने
लगी
है
नया
पहलू
सलीक़े
से
बयाँ
करना
पड़ेगा
कहानी
अब
तवज्जोह
से
सुनी
जाने
लगी
है
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Khurram Afaq
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किसी
तरह
सँभल
नहीं
रहा
हूँ
मैं
कि
बह
रहा
हूँ
चल
नहीं
रहा
हूँ
मैं
गले
लगा
ऐ
मौसमों
के
देवता
बदल
मुझे
बदल
नहीं
रहा
हूँ
मैं
ये
सुख
भी
है
कि
तेरे
ताक़चे
में
हूँ
ये
दुख
भी
है
कि
जल
नहीं
रहा
हूँ
मैं
सवाल
पूछने
लगे
हैं
रास्ते
सफ़र
पे
क्यूँँ
निकल
नहीं
रहा
हूँ
मैं
तुलूअ
हो
रहा
हूँ
दूसरी
तरफ़
उदास
मत
हो
ढल
नहीं
रहा
हूँ
मैं
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Khurram Afaq
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किए
कराए
का
सारा
हिसाब
दूँगा
मैं
सवाल
जो
भी
करोगे
जवाब
दूँगा
मैं
ये
रख-रखाव
कभी
ख़त्म
होने
वाला
नहीं
बिछड़ते
वक़्त
भी
तुझको
गुलाब
दूँगा
मैं
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Khurram Afaq
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