jaane kya aas lagaaee hai safar se main ne | जाने क्या आस लगाई है सफ़र से मैं ने

  - Khurram Afaq
जानेक्याआसलगाईहैसफ़रसेमैंने
एकतिनकाभीउठायानहींघरसेमैंने
वर्नाचुपकिससेरहाजाताहैइतनाअर्सा
तुझकोदेखाहीनहींऐसीनज़रसेमैंने
उतरआयाहैहरीफ़ोंकीतरफ़-दारीपर
वोजिसेसामनेकरनाथाउधरसेमैंने
यूँँकरवस्लकेलम्होंकोहवससेता'बीर
चंदपत्तेहीतोतोड़ेहैंशजरसेमैंने
देखनीहोकभीबेचैनीतोउनसेमिलना
जिनकोरोकाहैतिरीख़ैर-ख़बरसेमैंने
  - Khurram Afaq
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