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Khalid Moin
sehra ko dariyaa samjha tha
sehra ko dariyaa samjha tha | सहरा को दरिया समझा था
- Khalid Moin
सहरा
को
दरिया
समझा
था
मैं
भी
तुझ
को
क्या
समझा
था
हाथ
छुड़ा
कर
जाने
वाले
मैं
तुझ
को
अपना
समझा
था
फिर
जाऊंगा
अपनी
ज़बां
से
क्या
मुझ
को
ऐसा
समझा
था
इतनी
आँख
तो
मुझ
में
भी
थी
दुनिया
को
दुनिया
समझा
था
मैं
ने
तुझ
को
मंज़िल
जाना
तू
मुझ
को
रस्ता
समझा
था
बे-आईना
शहर
ने
मुझ
को
ख़ुद
सा
बे-चेहरा
समझा
था
क्या
से
क्या
निकला
है,
तू
भी
मैं
तुझ
को
कैसा
समझा
था
- Khalid Moin
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एक
दरिया
है
यहाँ
पर
दूर
तक
फैला
हुआ
आज
अपने
बाजुओं
को
देख
पतवारें
न
देख
Dushyant Kumar
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मैं
एक
ठहरा
हुआ
पुल,
तू
बहता
दरिया
है
तुझे
मिलूँगा
तो
फिर
टूट
कर
मिलूँगा
मैं
Subhan Asad
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मिल
जाऊँगा
दरिया
में
तो
हो
जाऊँगा
दरिया
सिर्फ़
इसलिए
क़तरा
हूँ
कि
मैं
दरिया
से
जुदा
हूँ
Nazeer Banarasi
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चाँद
चेहरा
ज़ुल्फ़
दरिया
बात
ख़ुशबू
दिल
चमन
इक
तुम्हें
दे
कर
ख़ुदा
ने
दे
दिया
क्या
क्या
मुझे
Bashir Badr
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इक
और
दरिया
का
सामना
था
'मुनीर'
मुझ
को
मैं
एक
दरिया
के
पार
उतरा
तो
मैंने
देखा
Muneer Niyazi
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तिरे
एहसास
में
डूबा
हुआ
मैं
कभी
सहरा
कभी
दरिया
हुआ
मैं
Siraj Faisal Khan
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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इतने
कहाँ
नसीब
कि
इस
सेे
प्यास
बुझाएँ
खेल
करें
दरिया
हम
जैसों
को
अपने
पास
बिठा
ले
काफ़ी
है
Vashu Pandey
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वो
इतना
शांत
दरिया
था
मगर
जब
गया
तो
ले
गया
सब
कुछ
बहा
के
Siddharth Saaz
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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हाथ
छुड़ा
कर
जाने
वाले
मैं
तुझ
को
अपना
समझा
था
Khalid Moin
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अक्स-दर-अक्स
बिखरना
है
मुझे
जाने
क्या
टूट
गया
है
मुझ
में
Khalid Moin
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मोहब्बत
की
तो
कोई
हद,
कोई
सरहद
नहीं
होती
हमारे
दरमियाँ
ये
फ़ासले,
कैसे
निकल
आए
Khalid Moin
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