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Kamlesh Goyal
haan mirii pahli nazar un se mili thii january men
haan mirii pahli nazar un se mili thii january men | हाँ मिरी पहली नज़र उन से मिली थी जनवरी में
- Kamlesh Goyal
हाँ
मिरी
पहली
नज़र
उन
से
मिली
थी
जनवरी
में
इश्क़
का
इज़हार
करना
है
मुझे
इस
फ़रवरी
में
- Kamlesh Goyal
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सच
बताओ
कि
सच
यही
है
क्या
साँस
लेना
ही
ज़िंदगी
है
क्या
कुछ
नया
काम
कर
नई
लड़की
इश्क़
करना
है
बावली
है
क्या
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Vikram Gaur Vairagi
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पलट
कर
लौट
आने
में
मज़ा
भी
है
मुहब्बत
भी
बुलाकर
देख
लो
शायद
पलट
कर
लौट
आएँ
हम
Gaurav Singh
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ज़रूरत
सब
कराती
है
मोहब्बत
भी
इबादत
भी
नहीं
तो
कौन
बेमतलब
किसी
को
याद
करता
है
Umesh Maurya
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किताब-ए-इश्क़
में
हर
आह
एक
आयत
है
पर
आँसुओं
को
हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त
समझ
Umair Najmi
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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माना
के
मोहब्बत
का
छुपाना
है
मोहब्बत
चुपके
से
किसी
रोज़
जताने
के
लिए
आ
Ahmad Faraz
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अदावत
मुहब्बत
रफ़ाक़त
नहीं
है
हमें
तुम
सेे
कोई
शिकायत
नहीं
है
दिलों
को
लगाने
लगे
हो
जहाँँ
तुम
वहाँ
तो
किसी
को
मुहब्बत
नहीं
है
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Tiwari Jitendra
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इक
और
इश्क़
की
नहीं
फुर्सत
मुझे
सनम
और
हो
भी
अब
अगर
तो
मेरा
मन
नहीं
बचा
Afzal Ali Afzal
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दिल
में
जो
मोहब्बत
की
रौशनी
नहीं
होती
इतनी
ख़ूब-सूरत
ये
ज़िंदगी
नहीं
होती
Hastimal Hasti
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मैं
चाहता
हूँ
मोहब्बत
मेरा
वो
हाल
करे
कि
ख़्वाब
में
भी
दोबारा
कभी
मजाल
न
हो
Jawwad Sheikh
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था
कहीं
कोई
जहाँ
में
'जौन'
जैसा
अब
नहीं
कोई
जहाँ
में
'जौन'
जैसा
Kamlesh Goyal
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इक
उसी
हसीं
लड़की
को
मैं
ख़्वाब
लिखता
हूँ
उस
के
प्यार
में
हासिल
वो
ख़िताब
लिखता
हूँ
अब
मिरी
अमावस
की
रात
भी
नहीं
होती
जब
तिरी
ये
सूरत
को
माहताब
लिखता
हूँ
हाँ
मिरा
तिरी
इक
मुस्कान
दिन
बनाती
है
जब
मैं
इन
लबों
को
ताज़ा
गुलाब
लिखता
हूँ
ये
नशा
चढ़ा
मुझ
पर
अब
नहीं
उतरता
है
मैं
तिरी
इन्हीं
नज़रों
को
शराब
लिखता
हूँ
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Kamlesh Goyal
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जब
कट
गए
हैं
वो
मुहब्बत
के
शजर
रोने
लगे
घर
से
जुदा
हो
कर
परिंदे
दर-ब-दर
रोने
लगे
आता
यहाँ
सच्ची
मुहब्बत
का
मज़ा
अब
और
भी
रोता
मुझे
देखे
फ़क़त
उनकी
नज़र
रोने
लगे
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Kamlesh Goyal
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मैं
जलवे
आप
को
अपने
हुनर
के
तो
दिखाऊँगा
मगर
कह
के
नहीं
अब
कुछ
मैं
कर
के
तो
दिखाऊँगा
Kamlesh Goyal
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डूबते
को
जैसे
तिनके
का
सहारा
हो
गया
है
हाँ
मुझे
वो
शख़्स
प्यारा
और
प्यारा
हो
गया
है
है
मुहब्बत
या
नहीं
मुझ
से
यही
बस
पूछना
था
कह
दिया
है
सब
झुकी
नज़रों
ने
यारा
हो
गया
है
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Kamlesh Goyal
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