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Kamlesh Goyal
ik usii haseen ladki ko main khwaab likhta hoonus ke pyaar men haasil vo khitaab likhta hooñ
ik usii haseen ladki ko main khwaab likhta hoonus ke pyaar men haasil vo khitaab likhta hooñ | इक उसी हसीं लड़की को मैं ख़्वाब लिखता हूँ
- Kamlesh Goyal
इक
उसी
हसीं
लड़की
को
मैं
ख़्वाब
लिखता
हूँ
उस
के
प्यार
में
हासिल
वो
ख़िताब
लिखता
हूँ
अब
मिरी
अमावस
की
रात
भी
नहीं
होती
जब
तिरी
ये
सूरत
को
माहताब
लिखता
हूँ
हाँ
मिरा
तिरी
इक
मुस्कान
दिन
बनाती
है
जब
मैं
इन
लबों
को
ताज़ा
गुलाब
लिखता
हूँ
ये
नशा
चढ़ा
मुझ
पर
अब
नहीं
उतरता
है
मैं
तिरी
इन्हीं
नज़रों
को
शराब
लिखता
हूँ
- Kamlesh Goyal
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ये
सर्द
रात
ये
आवारगी
ये
नींद
का
बोझ
हम
अपने
शहर
में
होते
तो
घर
चले
जाते
Ummeed Fazli
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कल
रात
मैं
बहुत
ही
अलग
सा
लगा
मुझे
उसकी
नज़र
ने
यूँँ
मेरी
सूरत
खंगाली
दोस्त
Afzal Ali Afzal
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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सर्द
रात
है
हवा
भी
सोच
मत
पहन
मुझे
सुब्ह
देख
लेंगे
किस
कलर
की
शाल
लेनी
है
Neeraj Neer
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खिड़कियों
से
झाँकती
है
रौशनी
बत्तियाँ
जलती
हैं
घर
घर
रात
में
Mohammad Alvi
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पैसा
कमाने
आते
हैं
सब
राजनीति
में
आता
नहीं
है
कोई
भी
खोने
के
वास्ते
छम्मो
का
मुजरा
सुनते
हैं
नेता
जो
रात
भर
संसद
भवन
में
आते
हैं
सोने
के
वास्ते
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Paplu Lucknawi
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नज़रें
हो
गड़ीं
जिनकी
वसीयत
पे
दिनो-रात
माँ-बाप
कि
'उम्रों
कि
दु'आ
खाक़
करेंगे
Asad Akbarabadi
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नींद
भी
जागती
रही
पूरे
हुए
न
ख़्वाब
भी
सुब्ह
हुई
ज़मीन
पर
रात
ढली
मज़ार
में
Adil Mansuri
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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आज
की
रात
दिवाली
है
दिए
रौशन
हैं
आज
की
रात
ये
लगता
है
मैं
सो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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हिना
जो
अस्ल
अपना
रंग
है
वो
तब
दिखाती
है
सनम
मेरी
उसे
जब
ख़ुद
के
हाथों
में
लगाती
है
इधर
लड़का
मुहब्बत
में
ये
ख़ुदस
बात
करता
है
उधर
लड़की
बुझे
चूल्हे
पे
ही
खाना
पकाती
है
लबों
से
कुछ
नहीं
कहती
मगर
मैं
जानता
हूँ
सब
तुझे
मुझ
सेे
मुहब्बत
है
तिरी
आँखें
बताती
है
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Kamlesh Goyal
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यहाँ
धरती
से
अंबर
को
मिलाए
वो
मुहब्बत
है
फ़क़त
जो
आदमी
को
रब
बनाए
वो
मुहब्बत
है
कभी
इस
प्रेम
में
राधा
दिवानी
श्याम
की
जैसे
कभी
उस
श्याम
में
मीरा
समाए
वो
मुहब्बत
है
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Kamlesh Goyal
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ज़रूरी
हो
गया
है
फिर
अभी
बरसात
का
होना
यहाँ
बूँदो
में
ये
आँसू
दिखाई
अब
नहीं
देते
Kamlesh Goyal
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हाँ
मिरी
पहली
नज़र
उन
से
मिली
थी
जनवरी
में
इश्क़
का
इज़हार
करना
है
मुझे
इस
फ़रवरी
में
Kamlesh Goyal
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फिर
कभी
तुम
पूछना
मत
ज़ात
मेरे
यार
की
दोस्ती
मज़हब
से
भी
बढ़
कर
है
उस
दिलदार
की
वो
मिरी
ख़ुशियों
में
शामिल
बाद
में
होता
मगर
हाँ
मुसीबत
में
कमी
पूरी
है
करता
चार
की
जो
बिना
बोले
मिरी
हर
बात
समझे
हाँ
मुझे
है
ज़रूरत
यार
की
ख़्वाहिश
है
ऐसे
प्यार
की
यार
भी
है
नाम
के
वो
दोस्ती
भी
नाम
की
जिस
में
यारो
ने
कभी
भी
हद
न
कोई
पार
की
दोस्ती
जब
भी
करो
कमलेश
बस
ऐसी
करो
यार
जो
अच्छी
तबीअत
कर
दे
हर
बीमार
की
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Kamlesh Goyal
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