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Kamlesh Goyal
hina jo asl apna rang hai vo tab dikhaati hai
hina jo asl apna rang hai vo tab dikhaati hai | हिना जो अस्ल अपना रंग है वो तब दिखाती है
- Kamlesh Goyal
हिना
जो
अस्ल
अपना
रंग
है
वो
तब
दिखाती
है
सनम
मेरी
उसे
जब
ख़ुद
के
हाथों
में
लगाती
है
इधर
लड़का
मुहब्बत
में
ये
ख़ुदस
बात
करता
है
उधर
लड़की
बुझे
चूल्हे
पे
ही
खाना
पकाती
है
लबों
से
कुछ
नहीं
कहती
मगर
मैं
जानता
हूँ
सब
तुझे
मुझ
सेे
मुहब्बत
है
तिरी
आँखें
बताती
है
- Kamlesh Goyal
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जो
बिस्मिल
बना
दे
वो
क़ातिल
तबस्सुम
जो
क़ातिल
बना
दे
वो
दिलकश
नज़ारा
मोहब्बत
का
भी
खेल
नाज़ुक
है
कितना
नज़र
मिल
गई
आप
जीते
मैं
हारा
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Nushur Wahidi
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मुझे
आँखें
दिखाकर
बोलती
है
चुप
रहो
भैया
बहिन
छोटी
भले
हो
बात
वो
अम्मा
सी
करती
है
Divy Kamaldhwaj
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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मैं
हर
शख़्स
के
चेहरे
को
बस
इस
उम्मीद
से
तकता
हूँ
शायद
से
मुझको
दो
आँखें
तेरे
जैसी
दिख
जाएँ
Siddharth Saaz
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बरस
रही
है
आँखें
हैं
ये
इनको
बादल
मत
कहना
मौत
हुई
है
दिल
की
मेरे
उसको
घाइल
मत
कहना
जीवन
भर
वो
साथ
रहेगा
प्यार
करेगा
बस
तुमको
मुझको
पागल
कह
देती
थी
उसको
पागल
मत
कहना
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Tanoj Dadhich
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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हाए
उसके
हाथ
पीले
होने
का
ग़म
इतना
रोए
हैं
कि
आँखें
लाल
कर
ली
Harsh saxena
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एक
चेहरा
है
जो
आँखों
में
बसा
रहता
है
इक
तसव्वुर
है
जो
तन्हा
नहीं
होने
देता
Javed Naseemi
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मुमकिन
है
कि
सदियों
भी
नज़र
आए
न
सूरज
इस
बार
अँधेरा
मिरे
अंदर
से
उठा
है
Aanis Moin
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कोई
चेहरा
किसी
को
उम्र
भर
अच्छा
नहीं
लगता
हसीं
है
चाँद
भी,
शब
भर
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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सभी
को
ये
हुनर
आता
है
जीने
का
यहाँ
'कमलेश'
तिरे
मरने
से
कोई
दूसरा
तो
अब
नहीं
मरता
Kamlesh Goyal
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था
कहीं
कोई
जहाँ
में
'जौन'
जैसा
अब
नहीं
कोई
जहाँ
में
'जौन'
जैसा
Kamlesh Goyal
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सब
के
सब
फ़क़त
हम
इंसान
बन
के
आए
थे
फिर
हुआ
ये
मिल
कर
मज़हब
बना
दिए
हम
ने
Kamlesh Goyal
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बुरा
मुझको
बुरा
अच्छा
फ़क़त
अच्छा
समझता
है
मुझे
है
जानकारी
कौन
मुझको
क्या
समझता
है
हमारी
इसलिए
तो
दोस्ती
होती
है
फिर
पक्की
यही
इक
सच
है
लड़के
को
यहाँ
लड़का
समझता
है
सुनो
मजबूर
हो
कर
फिर
किसी
ने
सर
झुकाया
है
मगर
हाकिम
इसे
भी
तो
यहाँ
सजदा
समझता
है
उसी
का
इश्क़
होता
है
मुकम्मल
इस
ज़माने
में
फ़क़त
जो
इश्क़
को
अपना
यहाँ
बच्चा
समझता
है
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Kamlesh Goyal
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इश्क़
तो
हम
ने
ये
मर
मर
के
किया
अव्वल
फिर
आ
गई
मौत
मुझे
इश्क़
ये
करते
करते
Kamlesh Goyal
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