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Kamlesh Goyal
sab ke sab faqat ham insaan ban ke aa.e the
sab ke sab faqat ham insaan ban ke aa.e the | सब के सब फ़क़त हम इंसान बन के आए थे
- Kamlesh Goyal
सब
के
सब
फ़क़त
हम
इंसान
बन
के
आए
थे
फिर
हुआ
ये
मिल
कर
मज़हब
बना
दिए
हम
ने
- Kamlesh Goyal
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तुम्हें
ये
किसने
कहा
रब
को
नहीं
मानता
मैं
ये
और
बात
कि
मज़हब
को
नहीं
मानता
मैं
Bhaskar Shukla
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अल्लाह
अल्लाह
हुस्न
की
ये
पर्दा-दारी
देखिए
भेद
जिस
ने
खोलना
चाहा
वो
दीवाना
हुआ
Arzoo Lakhnavi
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तेरा
रुख़-ए-मुख़त्तत
क़ुरआन
है
हमारा
बोसा
भी
लें
तो
क्या
है
ईमान
है
हमारा
Meer Taqi Meer
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रंग
और
नस्ल
ज़ात
और
मज़हब
जो
भी
है
आदमी
से
कमतर
है
इस
हक़ीक़त
को
तुम
भी
मेरी
तरह
मान
जाओ
तो
कोई
बात
बने
Sahir Ludhianvi
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अल्लाह
तेरे
हाथ
है
अब
आबरू-ए-शौक़
दम
घुट
रहा
है
वक़्त
की
रफ़्तार
देख
कर
Bismil Azimabadi
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अब
तो
मज़हब
कोई
ऐसा
भी
चलाया
जाए
जिस
में
इंसान
को
इंसान
बनाया
जाए
Gopaldas Neeraj
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क़ौम-ओ-मज़हब
क्या
किसी
का
और
क्या
है
रंग-ओ-नस्ल
ऐसी
बातें
छोड़
कर
बस
इल्म-ओ-फ़न
की
बात
हो
Sayan quraishi
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हम
ऐसे
सुनते
हैं
उसकी
बातों
को
जैसे
कोई
सूफ़ी
गाने
सुनता
है
Tanoj Dadhich
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उम्र
भर
कौन
निभाता
है
त'अल्लुक़
इतना
ऐ
मेरी
जान
के
दुश्मन
तुझे
अल्लाह
रक्खे
Ahmad Faraz
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अल्लाह
बना
दे
मिरे
अश्कों
को
कबूतर
सब
पूछ
रहे
हैं
तिरे
रूमाल
में
क्या
है
Khan Janbaz
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भूली-बिसरी
ही
सही
पर
इक
कहानी
याद
है
आदमी
है
वो
उसे
अपनी
जवानी
याद
है
भूल
जाती
है
यहाँ
लड़की
दिवाने
को
मगर
हम
दिवानों
को
वही
पहली
दिवानी
याद
है
अब
हमारा
हो
मुकम्मल
राब्ता
जाने
कहाँ
कौन
भूलेगा
लबों
पर
दी
निशानी
याद
है
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Kamlesh Goyal
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मुहब्बत
में
सुनो
ऐसे
सभी
के
हाल
होते
हैं
नज़र
ये
बोलती
है
और
मेरे
लब
ये
रोते
हैं
हमें
भी
दर्द
होता
है
सुनो
दिल
टूटता
है
जब
ये
लड़के
कह
नहीं
पाते
फ़क़त
तकिया
भिगोते
हैं
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Kamlesh Goyal
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मुझे
इक
दीद
की
चाहत
तुझे
देखूँ
तुझे
देखूँ
तिरे
दीदार
को
अटकी
हुई
है
साँस
आँखों
में
Kamlesh Goyal
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इश्क़
तो
हम
ने
ये
मर
मर
के
किया
अव्वल
फिर
आ
गई
मौत
मुझे
इश्क़
ये
करते
करते
Kamlesh Goyal
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ज़रूरी
हो
गया
है
फिर
अभी
बरसात
का
होना
यहाँ
बूँदो
में
ये
आँसू
दिखाई
अब
नहीं
देते
Kamlesh Goyal
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