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Kamlesh Goyal
main jalwe aap ko apne hunar ke to dikhaaunga
main jalwe aap ko apne hunar ke to dikhaaunga | मैं जलवे आप को अपने हुनर के तो दिखाऊँगा
- Kamlesh Goyal
मैं
जलवे
आप
को
अपने
हुनर
के
तो
दिखाऊँगा
मगर
कह
के
नहीं
अब
कुछ
मैं
कर
के
तो
दिखाऊँगा
- Kamlesh Goyal
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चल
गया
होगा
पता
ये
आपको
बे-वफ़ा
कहते
हैं
लड़के
आपको
इक
ज़रा
से
हुस्न
पर
इतनी
अकड़
तू
समझती
क्या
है
अपने
आपको
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Kushal Dauneria
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गर
अदीबों
को
अना
का
रोग
लग
जाए
तो
फिर
गुल
मोहब्बत
के
अदब
की
शाख़
पर
खिलते
नहीं
Afzal Ali Afzal
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बे-ख़ुदी
बे-सबब
नहीं
'ग़ालिब'
कुछ
तो
है
जिस
की
पर्दा-दारी
है
Mirza Ghalib
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उधारी
सर
से
ऊपर
बढ़
चुकी
है
हमारी
जान
जोखिम
में
पड़ी
है
हमीं
अपमान
सहकर
जी
रहे
हैं
अना
की
लाश
पंखे
पर
मिली
है
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Vikas Sahaj
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बस
यही
इक
हुनर
सीखना
है
मुझे
वो
मिरी
चुप्पी
कैसे
पढ़ा
करती
है
Harsh saxena
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देख
कैसे
धुल
गए
है
गिर्या-ओ-ज़ारी
के
बाद
आसमाँ
बारिश
के
बाद
और
मैं
अज़ादारी
के
बाद
इस
सेे
बढ़
कर
तो
तुझे
कोई
हुनर
आता
नहीं
सोचता
हूँ
क्या
करेगा
दिल
आज़ारी
के
बाद
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Abbas Tabish
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हुनर
से
काम
लिया
पेंट
ब्रश
नहीं
तोड़ा
बना
लिया
तेरे
जैसा
ही
कोई
रंगों
से
मुझे
ये
डर
है
कि
मिल
जाएगी
तो
रो
दूँगा
मैं
जिस
ख़ुशी
को
तरसता
रहा
हूँ
बरसों
से
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Rahul Gurjar
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हम
ने
क़ुबूल
कर
लिया
अपना
हर
एक
जुर्म
अब
आप
भी
तो
अपनी
अना
छोड़
दीजिए
Harsh saxena
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तमाम
उलझनों
में
भी
यूँँ
मुस्कुराता
है
न
जाने
इतना
हुनर
वो
कहाँ
से
लाता
है
Harsh saxena
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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था
कहीं
कोई
जहाँ
में
'जौन'
जैसा
अब
नहीं
कोई
जहाँ
में
'जौन'
जैसा
Kamlesh Goyal
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डूबते
को
जैसे
तिनके
का
सहारा
हो
गया
है
हाँ
मुझे
वो
शख़्स
प्यारा
और
प्यारा
हो
गया
है
है
मुहब्बत
या
नहीं
मुझ
से
यही
बस
पूछना
था
कह
दिया
है
सब
झुकी
नज़रों
ने
यारा
हो
गया
है
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Kamlesh Goyal
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वहीं
जब
दर्द
के
मारे
बदन
से
जाँ
निकलती
है
उसी
पर
बन
के
मरहम
तब
ज़बाँ
से
माँ
निकलती
है
Kamlesh Goyal
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हाँ
इश्क़
का
इज़हार
करना
है
अभी
तू
बिन
मुहब्बत
के
जिया
भी
है
कभी
ये
दिल
किसी
के
भी
नहीं
बस
में
मगर
सच
इक
यही
इस
दिल
के
बस
में
है
सभी
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Kamlesh Goyal
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हम
को
यहाँ
कोई
भी
ऐसा
मिला
नहीं
है
जिस
को
जनाब
हम
सेे
कोई
गिला
नहीं
है
Kamlesh Goyal
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