qalam uthaaun musalsal ravaan-davaan likh doon | क़लम उठाऊँ मुसलसल रवाँ-दवाँ लिख दूँ

  - Kalidas Gupta Raza
क़लमउठाऊँमुसलसलरवाँ-दवाँलिखदूँ
कोईपढ़ेपड़ेमैंकहानियाँलिखदूँ
जहाँतकआएँतसव्वुरमेंवादियाँलिखदूँ
फिरउनपेनामतुम्हारायहाँवहाँलिखदूँ
जहाँमिलेमुझेरोटीउसेलिखूँधरती
जहाँपहुँचसकूँउसकोआसमाँलिखदूँ
निकलचलूँकहींहुस्न-ओ-जुनूँकेजंगलमें
हिरनकीआँखमेंकाजलकीडोरियाँलिखदूँ
कहानीख़त्महुईलेकिनइसकाक्याकीजे
जोलफ़्ज़यादअबआएउन्हेंकहाँलिखदूँ
जोज़ेहनमेंहैंहुरूफ़उनकोकाममेंलाऊँ
जोदुखपड़ेहीहोंउनकीदास्ताँलिखदूँ
कुछऐसापत्रलिखूँआपकोजोभाजाए
मराहूँआपकेगिनअपनीख़ामियाँलिखदूँ
ग़ज़लतोकहदूँ'रज़ा'येभीतोइजाज़तहो
जिसेतूहिंदवीकहताथावोज़बाँलिखदूँ
  - Kalidas Gupta Raza
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