hai agarche shahar men apni shanaasaai bahut | है अगरचे शहर में अपनी शनासाई बहुत

  - Kaleem Usmani
हैअगरचेशहरमेंअपनीशनासाईबहुत
फिरभीरहताहैहमेंएहसास-ए-तन्हाईबहुत
अबयेसोचाहैकिअपनीज़ातमेंसिमटेरहें
हमनेकरकेदेखलीसबसेशनासाईबहुत
मुँहछुपाकरआस्तींमेंदेरतकरोतेरहे
रातढलतीचाँदनीमेंउसकीयादआईबहुत
क़तराक़तराअश्क-ए-ग़मआँखोंसेआख़िरबहगए
हमनेपलकोंकीउन्हेंज़ंजीरपहनाईबहुत
अपनासायाभीजुदालगताहैअपनीज़ातसे
हमनेउससेदिललगानेकीसज़ापाईबहुत
अबतोसैल-ए-दर्दथमजाएसकूँदिलकोमिले
ज़ख़्म-ए-दिलमेंचुकीहैअबतोगहराईबहुत
शामकेसायोंकीसूरतफैलतेजातेहैंहम
लगरहीतंगहमकोघरकीअँगनाईबहुत
आइनाबनकेवोसूरतसामनेजबगई
अक्सअपनादेखकरमुझकोहँसीआईबहुत
वोसहरतारीकियोंमेंआजभीरू-पोशहै
जिसकेग़ममेंखोचुकीआँखोंकीबीनाईबहुत
मैंतोझोंकाथाअसीर-ए-दामक्याहोता'कलीम'
उसनेज़ुल्फ़ोंकीमुझेज़ंजीरपहनाईबहुत
  - Kaleem Usmani
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