garche mahfooz rahe phool samar hone tak | गरचे महफ़ूज़ रहे फूल समर होने तक

  - Kaleem Qaisar Balrampuri
गरचेमहफ़ूज़रहेफूलसमरहोनेतक
फिरउन्हेंरोकपाओगेशजरहोनेतक
दिलमेंबसजाओकियेदर-ब-दरीठीकनहीं
इसमकाँमेंहीरहोतुमकोईघरहोनेतक
तुमतोसूरजकेपरस्तारहोतुमक्याजानो
क्यागुज़रजातीहैइकशबपेसहरहोनेतक
थकनेवालेनहींइसराहकेराहीहरगिज़
करतेजाएँगेसफ़रगर्द-ए-सफ़रहोनेतक
हौसलेज़र्रा-ए-नाचीज़केदेखो'क़ैसर'
ज़ुल्मत-ए-शबसेलड़ेशम्स-ओ-क़मरहोनेतक
  - Kaleem Qaisar Balrampuri
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