bahut tha naaz jin par ham unhin rishton pe hanste hain | बहुत था नाज़ जिन पर हम उन्हीं रिश्तों पे हँसते हैं

  - Kaleem Haider Sharar
बहुतथानाज़जिनपरहमउन्हींरिश्तोंपेहँसतेहैं
हमींक्यारस्म-ए-दुनियाहैकिसबअपनोंपेहँसतेहैं
हमऐसेलोगदीवारोंपेहँसनेकेनहींक़ाइल
मगरजबजीमेंआताहैतोदरवाज़ोंपेहँसतेहैं
दिवानाकरगयाआख़िरहमेंफ़रज़ाना-पनअपना
किजिनलोगोंकोरोनाथाहमउनलोगोंपेहँसतेहैं
अबइसकोज़िंदगीकहिएकिअहद-ए-बे-हिसीकहिए
घरोंमेंलोगरोतेहैंमगररस्तोंपेहँसतेहैं
यहाँअपनापरायाकुछनहींख़ुशबूपेमतजाओ
गलोंमेंपड़नेवालेफूलगुलदस्तोंपेहँसतेहैं
समझनेवालेक्याक्याकुछसमझतेहैं'शरर'-साहब
रग-ए-मअनीफड़कतीहैतोहमलफ़्ज़ोंपेहँसतेहैं
  - Kaleem Haider Sharar
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