zinda rahne ka bharam aa ke kahaan par toota | ज़िंदा रहने का भरम आ के कहाँ पर टूटा

  - Kaleem Haider Sharar
ज़िंदारहनेकाभरमकेकहाँपरटूटा
इकसितारासामिरीशह-रग-ए-जाँपरटूटा
ग़ैर-मुमकिनहैमिरीख़ाकउड़ाताकोई
मैंकिख़ुदअपनीतबाहीकेनिशाँपरटूटा
सूद-दर-सूदमुरव्वतमिरीकामआईहै
जबमैंइख़्लासकीमीज़ान-ए-ज़ियाँपरटूटा
ज़हरसाफैलचुकाहैमिरीशिरयानोंमें
कौनसाहर्फ़मिरीनोक-ए-ज़बाँपरटूटा
सिसकियाँभरके'शरर'कौनवहाँरोताथा
ख़ेमा-ए-ख़्वाबसर-ए-शामजहाँपरटूटा
  - Kaleem Haider Sharar
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