zor-e-baazu bhi hai aur saamne nakhchir bhi hai | ज़ोर-ए-बाज़ू भी है और सामने नख़चीर भी है

  - Kaleem Ahmadabadi
ज़ोर-ए-बाज़ूभीहैऔरसामनेनख़चीरभीहै
देखनायेहैकितरकशमेंकोईतीरभीहै
किसतरहइश्क़-ए-मजाज़ीकोहक़ीक़ीकरलूँ
सामनेतूहैबग़लमेंतिरीतस्वीरभीहै
कुछनहींहैतिरेहाथोंमेंलकीरोंकेसिवा
बातनासेहकीहैलेकिनख़त-ए-तक़्दीरभीहै
छेड़तीहैमुझेकेमिरीआज़ादी
गोमैंक़ैदीहूँमिरेपाँवमेंज़ंजीरभीहै
मेरेहोनेकामिरेहोशकोएहसासनहीं
वर्नाजोक़तरा-ए-ख़ूँहैवोशरर-गीरभीहै
अहल-ए-दिलकेलिएआज़ारहैदुनियाकोमुफ़ीद
अक़्लइकहोशहैऔरहोशकीता'बीरभीहै
कोईसमझेकिसमझेतिरेअशआ'र'कलीम'
ज़ोर-ए-'ग़ालिब'भीहैऔरदिलकशी-ए-'मीर'भीहै
  - Kaleem Ahmadabadi
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