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"Nadeem khan' Kaavish"
paisa-daulat kama kar marna hi hai ik din to
paisa-daulat kama kar marna hi hai ik din to | पैसा-दौलत कमा कर, मरना ही है इक दिन तो
- "Nadeem khan' Kaavish"
पैसा-दौलत
कमा
कर,
मरना
ही
है
इक
दिन
तो
थोड़ा
कुछ
नाम
कमा
कर
के
ही
घर
जाएँगे
- "Nadeem khan' Kaavish"
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रोज़
ढक
लेती
थी
नीला
जिस्म
अपना
शुक्र
है
आ
गई
बाहर
घर
की
बातें
Parul Singh "Noor"
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पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
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Tanoj Dadhich
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तेरी
यादें
लिपट
जाती
हैं
मुझ
से
घर
पहुँचते
ही
कि
जैसे
बाप
से
आकर
कोई
बच्ची
लिपटती
है
Afzal Ali Afzal
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ज़मीं
पे
घर
बनाया
है
मगर
जन्नत
में
रहते
हैं
हमारी
ख़ुश-नसीबी
है
कि
हम
भारत
में
रहते
हैं
Mehshar Afridi
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अच्छे
हो
कर
लौट
गए
सब
घर
लेकिन
मौत
का
चेहरा
याद
रहा
बीमारों
को
Shariq Kaifi
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हर
इक
सू
हैं
दर-ओ-दीवार
लेकिन
मुयस्सर
है
नहीं
घर-बार
लेकिन
Umrez Ali Haider
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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गुमान
है
या
किसी
विश्वास
में
है
सभी
अच्छे
दिनों
की
आस
में
है
ये
कैसा
जश्न
है
घर
वापसी
का
अभी
तो
राम
ही
वनवास
में
है
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Azhar Iqbal
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सफ़र
के
बाद
भी
ज़ौक़-ए-सफ़र
न
रह
जाए
ख़याल
ओ
ख़्वाब
में
अब
के
भी
घर
न
रह
जाए
Abhishek shukla
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लोग
हर
मोड़
पे
रुक
रुक
के
सँभलते
क्यूँँ
हैं
इतना
डरते
हैं
तो
फिर
घर
से
निकलते
क्यूँँ
हैं
मोड़
होता
है
जवानी
का
सँभलने
के
लिए
और
सब
लोग
यहीं
आ
के
फिसलते
क्यूँँ
हैं
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Rahat Indori
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ये
दुनिया
चल
रही
है
उस
ख़ुदा
के
इक
इशारे
पर
वो
चाहे
जो
अता
कर
दे,
वो
चाहे
तो
फ़ना
कर
दे
"Nadeem khan' Kaavish"
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मुफ़्लिसी
ऐसी
कि
इक
दिन
पेट
भरने
के
लिए
आँख
फोड़ी
जाएगी
आँसू
निकाले
जाएँगे
क़ब्र
के
आग़ोश
में
ये
दिल
मेरा
जब
आएगा
दिल
की
तह
को
खोदकर
जुगनू
निकाले
जाएँगे
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"Nadeem khan' Kaavish"
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सर्द
हवाएँ,
ये
दिसम्बर
और
उसकी
याद
आग
लगे
सबको,
चलो
चाय
पीते
हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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जब
भी
काली
रातों
में
इक
तारा
नीचे
गिरता
है
कोई
टूटा
बिखरा
सपना
सारा
नीचे
गिरता
है
हो
यक़ीं
ख़ुद
पर
तो
यारों
क़ामयाबी
मिलती
है
क्या
कोई
पंछी
कभी
दोबारा
नीचे
गिरता
है
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"Nadeem khan' Kaavish"
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इसी
उम्मीद
पे
ज़िंदा
रहे
हम
कि
तुम
सेे
फिर
मिलेंगे
आसमाँ
में
"Nadeem khan' Kaavish"
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