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"Nadeem khan' Kaavish"
ek tasveer ne mujhe
ek tasveer ne mujhe | एक तस्वीर ने मुझे
- "Nadeem khan' Kaavish"
एक
तस्वीर
ने
मुझे
आज
तस्वीर
कर
दिया
- "Nadeem khan' Kaavish"
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बिठा
दिया
है
सिपाही
के
दिल
में
डर
उसने
तलाशी
दी
है
दुपट्टा
उतार
कर
उसने
मैं
इसलिए
भी
उसे
ख़ुद-कुशी
से
रोकता
हूँ
लिखा
हुआ
है
मेरा
नाम
जिस्म
पर
उसने
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Zia Mazkoor
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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सुतून-ए-दार
पे
रखते
चलो
सरों
के
चराग़
जहाँ
तलक
ये
सितम
की
सियाह
रात
चले
Majrooh Sultanpuri
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उसके
हाथ
में
बाक़ी
क्या
रह
जाता
है
तुमने
जिसका
हाथ
पकड़कर
छोड़
दिया
Vashu Pandey
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तन्हाई
के
हुजूम
में
वो
एक
तेरी
याद
जैसे
अँधेरी
रात
में
जलता
हुआ
दिया
Sagheer Lucky
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उस
के
फ़रोग़-ए-हुस्न
से
झमके
है
सब
में
नूर
शम-ए-हरम
हो
या
हो
दिया
सोमनात
का
Meer Taqi Meer
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यार
उसके
क़ीमती
तोहफ़े
तो
लाए
थे
बहुत
मैं
बरेली
का
था
मैंने
ला
के
झुमका
दे
दिया
Rudransh Trigunayat
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ये
शुक्र
है
कि
मिरे
पास
तेरा
ग़म
तो
रहा
वगर्ना
ज़िंदगी
भर
को
रुला
दिया
होता
Gulzar
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तुझे
किसी
ने
ग़लत
कह
दिया
मेरे
बारे
नहीं
मियाँ
मैं
दिलों
को
दुखाने
वाला
नहीं
Ali Zaryoun
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मैं
ने
उस
की
तरफ़
से
ख़त
लिक्खा
और
अपने
पते
पे
भेज
दिया
Fahmi Badayuni
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अकेले
काट
लेना
ज़िंदगी,
ख़ुद
तर्बियत
करना
तुम
अपने
जिस्म
की
हर
एक
पे
खै़रात
मत
करना
अगर
मैं
मर
गया
तो
यार
तुम
रोना
नहीं
बिल्कुल
मेरे
हक़
में
दु'आ
करना,
दुआ-ए-मग़्फ़िरत
करना
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"Nadeem khan' Kaavish"
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मुझे
पहले
यूँँ
लगता
था
मुहब्बत
ही
इबादत
है
"Nadeem khan' Kaavish"
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मेरी
ग़ज़लें
गुनगुनाती
थी
वो
हर
शब
उसको
मीरा
सी
दिवानी
लिख
रहे
हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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हमारे
दिल
की
चाहत
थी,
नहीं
ना
तुझे
मुझ
सेे
मुहब्बत
थी,
नहीं
ना
बता
मेरी
जमा
तस्वीर
कोई,
कभी
तेरी
इबादत
थी,
नहीं
ना
कभी
पागल
हुए
मेरे
लिए
तुम
कभी
मिलने
की
हसरत
थी,नहीं
ना
हमेशा
मैं
ही
समझौता
करूँं
क्या
मुहब्बत
क्या
सियासत
थी,नहीं
ना
मिला
ना
अब
नज़र
को,
बोल
भी
कुछ
क़सम
है
बोल
उल्फ़त
थी,नहीं
ना
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"Nadeem khan' Kaavish"
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उसने
सलीक़े
से
दुपट्टा
ओढ़ा,
सुनते
ही
अज़ान
ये
देखकर
'काविश'
मेरा
ईमान
ताज़ा
हो
गया
"Nadeem khan' Kaavish"
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