kahii se laut ke ham ladhkad | कहीं से लौट के हम लड़खड़ाए हैं क्या क्या

  - Kaifi Azmi
कहींसेलौटकेहमलड़खड़ाएहैंक्याक्या
सितारेज़ेर-ए-क़दमरातआएहैंक्याक्या
नशेब-ए-हस्तीसेअफ़्सोसहमउभरसके
फ़राज़-ए-दारसेपैग़ामआएहैंक्याक्या
जबउसनेहारकेख़ंजरज़मींपेफेंकदिया
तमामज़ख़्म-ए-जिगरमुस्कुराएहैंक्याक्या
छटाजहाँसेउसआवाज़काघनाबादल
वहींसेधूपनेतलवेजलाएहैंक्याक्या
उठाकेसरमुझेइतनातोदेखलेनेदे
किक़त्ल-गाहमेंदीवानेआएहैंक्याक्या
कहींअँधेरेसेमानूसहोजाएअदब
चराग़तेज़हवानेबुझाएहैंक्याक्या
  - Kaifi Azmi
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