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Kaifi Azmi
haath aa kar laga gaya koi
haath aa kar laga gaya koi | हाथ आ कर लगा गया कोई
- Kaifi Azmi
हाथ
आ
कर
लगा
गया
कोई
मेरा
छप्पर
उठा
गया
कोई
लग
गया
इक
मशीन
में
मैं
भी
शहर
में
ले
के
आ
गया
कोई
मैं
खड़ा
था
कि
पीठ
पर
मेरी
इश्तिहार
इक
लगा
गया
कोई
ये
सदी
धूप
को
तरसती
है
जैसे
सूरज
को
खा
गया
कोई
ऐसी
महँगाई
है
कि
चेहरा
भी
बेच
के
अपना
खा
गया
कोई
अब
वो
अरमान
हैं
न
वो
सपने
सब
कबूतर
उड़ा
गया
कोई
वो
गए
जब
से
ऐसा
लगता
है
छोटा
मोटा
ख़ुदा
गया
कोई
मेरा
बचपन
भी
साथ
ले
आया
गाँव
से
जब
भी
आ
गया
कोई
- Kaifi Azmi
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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उरूज
पर
है
अज़ीज़ो
फ़साद
का
सूरज
जभी
तो
सूखती
जाती
हैं
प्यार
की
झीलें
Nami Nadri
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मुमकिन
है
कि
सदियों
भी
नज़र
आए
न
सूरज
इस
बार
अँधेरा
मिरे
अंदर
से
उठा
है
Aanis Moin
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वो
जिसपर
उसकी
रहमत
हो
वो
दौलत
मांगता
है
क्या
मोहब्बत
करने
वाला
दिल
मोहब्बत
मांगते
है
क्या
तुम्हारा
दिल
कहे
जब
भी
उजाला
बन
के
आ
जाना
कभी
उगता
हुआ
सूरज
इज़ाज़त
मांगता
है
क्या
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Ankita Singh
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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सूरज
से
जंग
जीतने
निकले
थे
बेवक़ूफ़
सारे
सिपाही
मोम
के
थे
घुल
के
आ
गए
Rahat Indori
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अभी
चाहिए
और
कितनी
बुलन्दी
कि
सहमा
है
सूरज
इमारत
के
पीछे
Kanha Mohit
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सूरज
लिहाफ़
ओढ़
के
सोया
तमाम
रात
सर्दी
से
इक
परिंदा
दरीचे
में
मर
गया
Athar nasik
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तू
है
सूरज
तुझे
मालूम
कहाँ
रात
का
दुख
तू
किसी
रोज़
मेरे
घर
में
उतर
शाम
के
बाद
Farhat Abbas Shah
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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रोज़
बस्ते
हैं
कई
शहर
नए
रोज़
धरती
में
समा
जाते
हैं
Kaifi Azmi
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रहने
को
सदा
दहर
में
आता
नहीं
कोई
तुम
जैसे
गए
ऐसे
भी
जाता
नहीं
कोई
Kaifi Azmi
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पत्थर
के
ख़ुदा
वहाँ
भी
पाए
हम
चाँद
से
आज
लौट
आए
दीवारें
तो
हर
तरफ़
खड़ी
हैं
क्या
हो
गए
मेहरबान
साए
जंगल
की
हवाएँ
आ
रही
हैं
काग़ज़
का
ये
शहर
उड़
न
जाए
लैला
ने
नया
जनम
लिया
है
है
क़ैस
कोई
जो
दिल
लगाए
है
आज
ज़मीं
का
ग़ुस्ल-ए-सेह्हत
जिस
दिल
में
हो
जितना
ख़ून
लाए
सहरा
सहरा
लहू
के
खे़
में
फिर
प्यासे
लब-ए-फ़ुरात
आए
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Kaifi Azmi
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झुकी
झुकी
सी
नज़र
बे-क़रार
है
कि
नहीं
दबा
दबा
सा
सही
दिल
में
प्यार
है
कि
नहीं
तू
अपने
दिल
की
जवाँ
धड़कनों
को
गिन
के
बता
मिरी
तरह
तिरा
दिल
बे-क़रार
है
कि
नहीं
वो
पल
कि
जिस
में
मोहब्बत
जवान
होती
है
उस
एक
पल
का
तुझे
इंतिज़ार
है
कि
नहीं
तिरी
उमीद
पे
ठुकरा
रहा
हूँ
दुनिया
को
तुझे
भी
अपने
पे
ये
ए'तिबार
है
कि
नहीं
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Kaifi Azmi
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बेलचे
लाओ
खोलो
ज़मीं
की
तहें
मैं
कहाँ
दफ़्न
हूँ
कुछ
पता
तो
चले
Kaifi Azmi
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