mujh se ab tak ye gilaa hai mire gham-khwaron ko | मुझ से अब तक ये गिला है मिरे ग़म-ख़्वारों को

  - Kafeel Aazar Amrohvi
मुझसेअबतकयेगिलाहैमिरेग़म-ख़्वारोंको
क्यूँँछुआमैंनेतिरीयादकेअँगारोंको
ज़ेहनदिलहश्रकेसूरजकीतरहजलतेहैं
जबसेछोड़ाहैतिरेशहरकीदीवारोंको
आजभीआपकीयादोंकेमुक़द्दसझोंके
छेड़जातेहैंमोहब्बतकेगुनहगारोंको
आरज़ूसोचतड़पदर्दकसकग़मआँसू
हमसेक्याक्यामिलाहिज्रकेबाज़ारोंको
तेरेजलतेहुएहोंटोंकीहरारतमिली
मेरीतन्हाईकेभीगेहुएरुख़्सारोंको
तुमकोमाहौलसेहोजाएगीनफ़रत'आज़र'
इतनेनज़दीकसेदेखाकरोयारोंको
  - Kafeel Aazar Amrohvi
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