ham-saaye se talab karoon paani ke ba'ad kya | हम-साए से तलब करूँँ पानी के बा'द क्या

  - Kabeer Athar
हम-साएसेतलबकरूँँपानीकेबा'दक्या
रहताहैहोशनक़्ल-ए-मकानीकेबा'दक्या
येकैसीतोड़फोड़हैशहर-ए-वुजूदमें
आतंकमचगयाहैजवानीकेबा'दक्या
पानीकेपाँवकाटनेपेतुलगएहोतुम
दरियामेंबचरहेगारवानीकेबा'दक्या
बातोंकेसाथमुँहसेटपकनेलगाहैख़ूँ
मरजाउँगामैंहिज्र-बयानीकेबा'दकिया
उनकोबताउँगाजिन्हेंहूरोंसेइश्क़है
दर-अस्लहोगाआलम-ए-फ़ानीकेबा'दक्या
मैंदेखताहूँआँखमेंख़्वाबोंकीमय्यतें
तुमदेखतेहोअश्क-फ़िशानीकेबा'दक्या
शे'रोंपेज़ुल्मकरतेहैंजोजानतेनहीं
करनाहैकाममिस्रा-ए-सानीकेबा'दक्या
क्यूँँलफ़्ज़लफ़्ज़खोदतेहोशे'रको'कबीर'
शाइ'रनिकालनाहैमआ'नीकेबा'दक्या
  - Kabeer Athar
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