idhar ye haal ki choone ka ikhtiyaar nahin | इधर ये हाल कि छूने का इख़्तियार नहीं

  - Jawwad Sheikh
इधरयेहालकिछूनेकाइख़्तियारनहीं
उधरवोहुस्नकिआँखोंपेए'तिबारनहीं
मैंअबकिसीकीभीउम्मीदतोड़सकताहूँ
मुझेकिसीपेभीअबकोईए'तिबारनहीं
तुमअपनीहालत-ए-ग़ुर्बतकाग़ममनातेहो
ख़ुदाकाशुक्रकरोमुझसेबे-दयारनहीं
मैंसोचताहूँकिवोभीदुखीहोजाए
येदास्तानकोईऐसीख़ुश-गवारनहीं
तोक्यायक़ीनदिलानेसेमानजाओगे?
यक़ींदिलाऊँकियेहिज्रदिलपेबारनहीं
क़दमक़दमपेनईठोकरेंहैंराहोंमें
दयार-ए-इश्क़मेंकोईभीकामगारनहीं
यहीसुकूनमिरीबे-कलीबनजाए
किज़िंदगीमेंकोईवजह-ए-इन्तिज़ारनहीं
ख़ुदाकेबारेमेंइकदिनज़रूरसोचेंगे
अभीतोख़ुदसेत'अल्लुक़भीउस्तुवारनहीं
गिलातोमुझसेवोकरताहैइसतरह'जव्वाद'
किजैसेमैंतोजुदाईमेंसोगवारनहीं
  - Jawwad Sheikh
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy