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Jawwad Sheikh
sab ko bachao KHud bhi bacho fasla rakho
sab ko bachao KHud bhi bacho fasla rakho | सब को बचाओ ख़ुद भी बचो फ़ासला रखो
- Jawwad Sheikh
सब
को
बचाओ
ख़ुद
भी
बचो
फ़ासला
रखो
अब
और
कुछ
करो
न
करो
फ़ासला
रखो
ख़तरा
तो
मुफ़्त
में
भी
नहीं
लेना
चाहिए
घर
से
निकल
के
मोल
न
लो
फ़ासला
रखो
फ़िलहाल
इस
से
बचने
का
है
एक
रास्ता
वो
ये
कि
इस
से
बच
के
रहो
फ़ासला
रखो
दुश्मन
है
और
तरह
का
जंग
और
तरह
की
आगे
बढ़ो
न
पीछे
हटो
फ़ासला
रखो
- Jawwad Sheikh
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इसलिए
लड़ता
है
मुझ
सेे
मेरा
दुश्मन
उसका
भी
मेरे
सिवा
कोई
नहीं
है
Aves Sayyad
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ख़ास
तो
कुछ
भी
नहीं
बदला
तुम्हारे
बाद
में
पहले
गुम
रहता
था
तुम
में,
अब
तुम्हारी
याद
में
मोल
हासिल
हो
गया
है
मुझको
इक-इक
शे'र
का
सब
दिलासे
दे
रहे
हैं
मुझको
"जस्सर"
दाद
में
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Avtar Singh Jasser
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तेरी
तारीफ़
करने
लग
गए
हैं
तेरे
दुश्मन
हमारे
शे'र
सुनके
Tanoj Dadhich
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कहाँ
की
दोस्ती
किन
दोस्तों
की
बात
करते
हो
मियाँ
दुश्मन
नहीं
मिलता
कोई
अब
तो
ठिकाने
का
Waseem Barelvi
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उस
दुश्मन-ए-वफ़ा
को
दु'आ
दे
रहा
हूँ
मैं
मेरा
न
हो
सका
वो
किसी
का
तो
हो
गया
Hafeez Banarasi
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चार
दिन
झूठी
बाहों
के
आराम
से
मेरी
बिखरी
हुई
ज़िंदगी
ठीक
है
दोस्ती
चाहे
जितनी
बुरी
हो
मगर
प्यार
के
नाम
पर
दुश्मनी
ठीक
है
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SHIV SAFAR
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तेरा
बनता
था
कि
तू
दुश्मन
हो
अपने
हाथों
से
खिलाया
था
तुझे
तेरी
गाली
से
मुझे
याद
आया
कितने
तानों
से
बचाया
था
तुझे
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Ali Zaryoun
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शिकस्ता
नाव
समझ
कर
डुबोने
वाले
लोग
न
पा
सके
मुझे
साहिल
पे
खोने
वाले
लोग
ज़रा
सा
वक़्त
जो
बदला
तो
हम
पे
हँसने
लगे
हमारे
काँधे
पे
सर
रख
के
रोने
वाले
लोग
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Kashif Sayyed
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जुदा
किसी
से
किसी
का
ग़रज़
हबीब
न
हो
ये
दाग़
वो
है
कि
दुश्मन
को
भी
नसीब
न
हो
Nazeer Akbarabadi
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कुछ
ख़ास
तो
बदला
नहीं
जाने
से
तुम्हारे
बस
राब्ता
कम
हो
गया
फूलों
की
दुकाँ
से
Ashu Mishra
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मैं
अब
किसी
की
भी
उम्मीद
तोड़
सकता
हूँ
मुझे
किसी
पे
भी
अब
कोई
ए'तिबार
नहीं
Jawwad Sheikh
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उस
ने
कोई
तो
दम
पढ़ा
हुआ
है
जिस
ने
देखा
वो
मुब्तला
हुआ
है
अब
तिरे
रास्ते
से
बच
निकलूँ
इक
यही
रास्ता
बचा
हुआ
है
आओ
तक़रीब-ए-रू-नुमाई
करें
पाँव
में
एक
आबला
हुआ
है
फिर
वही
बहस
छेड़
देते
हो
इतनी
मुश्किल
से
राब्ता
हुआ
है
रात
की
वारदात
मत
पूछो
वाक़ई
एक
वाक़िआ
हुआ
है
लग
रहा
है
ये
नर्म
लहजे
से
फिर
तुझे
कोई
मसअला
हुआ
है
मैं
कहाँ
और
वो
फ़सील
कहाँ
फ़ासले
का
ही
फ़ैसला
हुआ
है
इतना
मसरूफ़
हो
गया
हूँ
कि
बस
'मीर'
भी
इक
तरफ़
पड़ा
हुआ
है
आज
कुछ
भी
नहीं
हुआ
'जव्वाद'
हाँ
मगर
एक
सानेहा
हुआ
है
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Jawwad Sheikh
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क्या
है
जो
हो
गया
हूँ
मैं
थोड़ा
बहुत
ख़राब
थोड़ा
बहुत
ख़राब
तो
होना
भी
चाहिए
Jawwad Sheikh
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मैं
चाहता
हूँ
मोहब्बत
मुझे
फ़ना
कर
दे
फ़ना
भी
ऐसा
कि
जिस
की
कोई
मिसाल
न
हो
Jawwad Sheikh
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मैं
किसी
तरह
भी
समझौता
नहीं
कर
सकता
या
तो
सब
कुछ
ही
मुझे
चाहिए
या
कुछ
भी
नहीं
Jawwad Sheikh
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