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Jawwad Sheikh
daad to baad men kamaayenge
daad to baad men kamaayenge | दाद तो बाद में कमाएँगे
- Jawwad Sheikh
दाद
तो
बाद
में
कमाएँगे
पहले
हम
सोचना
सिखाएँगे
मैं
कहीं
जा
नहीं
रहा
लेकिन
आप
क्या
मेरे
साथ
आएँगे
कोई
खिड़की
खुलेगी
रात
गए
कई
अपनी
मुराद
पाएँगे
खुल
के
रोने
पे
इख़्तियार
नहीं
हम
कोई
जश्न
क्या
मनाएँगे
हँसेंगे
तेरी
बद-हवा
सेी
पर
लोग
रस्ता
नहीं
बताएँगे
तुम
उठाओगे
कोई
रंज
मिरा
दोस्त
अहबाब
हज़
उठाएँगे
हमें
अपनी
तलाश
में
मत
भेज
खड़ी
फ़सलें
उजाड़
आएँगे
- Jawwad Sheikh
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लोग
टूट
जाते
हैं
एक
घर
बनाने
में
तुम
तरस
नहीं
खाते
बस्तियाँ
जलाने
में
Bashir Badr
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जो
लोग
ख़ुद
न
करते
थे
होंठों
से
पान
साफ़
पलकों
से
कर
रहे
हैं
तेरा
पायदान
साफ़
Charagh Sharma
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कैसे
मंज़र
सामने
आने
लगे
हैं
गाते
गाते
लोग
चिल्लाने
लगे
हैं
Dushyant Kumar
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हर
आदमी
में
होते
हैं
दस
बीस
आदमी
जिस
को
भी
देखना
हो
कई
बार
देखना
Nida Fazli
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बस-कि
दुश्वार
है
हर
काम
का
आसाँ
होना
आदमी
को
भी
मुयस्सर
नहीं
इंसाँ
होना
Mirza Ghalib
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गरचे
अहल-ए-शराब
हैं
हम
लोग
ये
न
समझो
ख़राब
हैं
हम
लोग
Jigar Moradabadi
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तलब
करें
तो
ये
आँखें
भी
इन
को
दे
दूँ
मैं
मगर
ये
लोग
इन
आँखों
के
ख़्वाब
माँगते
हैं
Abbas rizvi
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मत
सहल
हमें
जानो
फिरता
है
फ़लक
बरसों
तब
ख़ाक
के
पर्दे
से
इंसान
निकलते
हैं
Meer Taqi Meer
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उसके
अच्छे
शे'र
नहीं
भाते
हमको
जो
अच्छा
इंसान
नहीं
बन
पाता
है
Tanoj Dadhich
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आप
की
सादा-दिली
से
तंग
आ
जाता
हूँ
मैं
मेरे
दिल
में
रह
चुके
हैं
इस
क़दर
हुश्यार
लोग
Nomaan Shauque
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न
सही
ऐश
गुज़ारा
ही
सही
यानी
गर
तू
नहीं
दुनिया
ही
सही
छोड़िए
कुछ
तो
मेरा
भी
मुझ
में
ख़ून
का
आख़िरी
क़तरा
ही
सही
ग़ौर
तो
कीजे
मेरी
बातों
पर
उम्र
में
आप
से
छोटा
ही
सही
रंज
हम
ने
भी
जुदा
पाए
हैं
आप
यकता
हैं
तो
यकता
ही
सही
मैं
बुरा
हूँ
तो
हूँ
अब
क्या
कीजे
कोई
अच्छा
है
तो
अच्छा
ही
सही
किस
को
सीने
से
लगाऊँ
तेरे
बाद
जाते
जाते
कोई
धोका
ही
सही
कर
कुछ
ऐसा
कि
तुझे
याद
रखूँ
भूल
जाने
का
तक़ाज़ा
ही
सही
तुम
पे
कब
रोक
थी
चलते
जाते
मेरी
सोचों
पे
तो
पहरा
ही
सही
वो
किसी
तौर
न
होगा
मेरा
चलो
ऐसा
है
तो
ऐसा
ही
सही
सुर्ख़
करने
लगी
हर
शय
'जव्वाद'
याद
का
रंग
सुनहरा
ही
सही
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Jawwad Sheikh
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कोई
इतना
प्यारा
कैसे
हो
सकता
है
फिर
सारे
का
सारा
कैसे
हो
सकता
है
तुझ
सेे
जब
मिलकर
भी
उदासी
कम
नहीं
होती
तेरे
बग़ैर
गुज़ारा
कैसे
हो
सकता
है
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Jawwad Sheikh
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मैंने
इक
उम्र
से
बटुए
में
सँभाली
हुई
है
वही
तस्वीर
जो
इक
पल
नहीं
देखी
जाती
Jawwad Sheikh
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मैं
ऐसी
उम्र
से
दुख
झेलने
लगा
'जव्वाद'
जो
आम
तौर
पे
होती
है
खेलने
वाली
Jawwad Sheikh
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अब
हमें
देख
के
लगता
तो
नहीं
है
लेकिन
हम
कभी
उसके
पसंदीदा
हुआ
करते
थे
Jawwad Sheikh
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