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Javed Aslam
the makeen mom-dil sabhi is
the makeen mom-dil sabhi is | थे मकीं मोम-दिल सभी इस
- Javed Aslam
थे
मकीं
मोम-दिल
सभी
इस
में
घर
मेरा
देर
तक
जला
होगा
- Javed Aslam
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जितने
मर्ज़ी
महँगे
पकवानों
को
खालो
तुम
घर
की
रोटी
तो
फिर
घर
की
रोटी
होती
है
Sarvjeet Singh
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एक
मुद्दत
से
हैं
सफ़र
में
हम
घर
में
रह
कर
भी
जैसे
बेघर
से
Azhar Iqbal
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समझ
के
आग
लगाना
हमारे
घर
में
तुम
हमारे
घर
के
बराबर
तुम्हारा
भी
घर
है
Hafeez Banarasi
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मैं
ये
भी
चाहती
हूँ
तिरा
घर
बसा
रहे
और
ये
भी
चाहती
हूँ
कि
तू
अपने
घर
न
जाए
Rehana Roohi
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वो
मेरे
घर
नहीं
आता
मैं
उस
के
घर
नहीं
जाता
मगर
इन
एहतियातों
से
त'अल्लुक़
मर
नहीं
जाता
Waseem Barelvi
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घर
से
निकले
थे
हौसला
कर
के
लौट
आए
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
ज़िंदगी
तो
कभी
नहीं
आई
मौत
आई
ज़रा
ज़रा
करके
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Rajesh Reddy
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ये
परिंदे
भी
खेतों
के
मज़दूर
हैं
लौट
के
अपने
घर
शाम
तक
जाएँगे
Bashir Badr
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तू
अपने
घर
में
मुहब्बत
की
जीत
पर
ख़ुश
है
अभी
ठहर
के
मेरा
ख़ानदान
बाक़ी
है
Siraj Faisal Khan
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सफ़र
के
बाद
भी
ज़ौक़-ए-सफ़र
न
रह
जाए
ख़याल
ओ
ख़्वाब
में
अब
के
भी
घर
न
रह
जाए
Abhishek shukla
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अजब
अंदाज़
से
ये
घर
गिरा
है
मिरा
मलबा
मिरे
ऊपर
गिरा
है
Aanis Moin
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लकीर-ए-इख़्तितामी
का
पता
मा'लूम
किसको
है
अजब
सी
दौड़
है
उनको
कहाँ
जाने
की
जल्दी
है
Javed Aslam
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ख़ूब-सूरत
है
ये
जहाँ
देखो
ये
ज़मीं
ही
क्यूँ
आसमाँ
देखो
चलते
रहना
है
जानिब-ए-मंज़िल
रुक
न
जाए
ये
कारवाँ
देखो
एक
उंगली
उठी
है
इस
जानिब
तीन
का
रुख़
भि
मेरी
जाँ
देखो
क्या
कहा
तुम
को
भी
मोहब्बत
है?
साथ
छोड़ोगे
तुम
कहाँ
देखो
पूछो
मत
उन
कि
बेरुख़ी
क्यूँ
है
उन
का
मतलब
है
जो
वहाँ
देखो
राह
देखा
किए
बहारों
की
आ
गया
मौसम-ए-ख़िज़ाँ
देखो
तोड़ने
वाले
थक
गए
'असलम'
दिल
तिरा
अब
भी
है
जवाँ
देखो
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Javed Aslam
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ढूँढ़
लूँगा
नज़र
उठा
तो
सही
प्यार
दिल
में
तिरे
छुपा
होगा
Javed Aslam
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लगाना
ज़र्ब
जब
दिल
पर
तो
ज़ालिम
याद
ये
रखना
इसी
दिल
में
तुम्हारी
ज़ात
की
तौक़ीर
होती
है
Javed Aslam
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अश्क
को
गौहर
बना
लो
दर्द
को
ज़ेवर
बना
लो
राह
के
पत्थर
को
'असलम'
मील
के
पत्थर
बना
लो
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Javed Aslam
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