hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Javed Aslam
relgaadi hai ye jahaan apna
relgaadi hai ye jahaan apna | रेलगाड़ी है ये जहाँ अपना
- Javed Aslam
रेलगाड़ी
है
ये
जहाँ
अपना
मंज़िलें
अपनी
अपने
सामाँ
हैं
हम
सेफ़र
थे
जो
एक
दो
पल
के
मेरे
दिल
के
वो
ख़ास
मेहमाँ
हैं
- Javed Aslam
Download Sher Image
बताऊँ
क्या
तुझे
ऐ
हम-नशीं
किस
से
मोहब्बत
है
मैं
जिस
दुनिया
में
रहता
हूँ
वो
इस
दुनिया
की
औरत
है
Asrar Ul Haq Majaz
Send
Download Image
55 Likes
लगा
जब
कि
दुनिया
की
पहली
ज़रूरत
मोहब्बत
है
तब
उसने
माना
यक़ीं
हो
गया
जब
मोहब्बत
ज़रूरत
है
तब
उसने
माना
वगरना
तो
ये
लोग
उसे
ख़ुद-कुशी
के
लिए
कह
चुके
थे
उसे
आइने
ने
बताया
कि
वो
ख़ूब-सूरत
है
तब
उसने
माना
Read Full
Vikram Gaur Vairagi
Send
Download Image
52 Likes
हम
क्या
करें
अगर
न
तिरी
आरज़ू
करें
दुनिया
में
और
भी
कोई
तेरे
सिवा
है
क्या
Hasrat Mohani
Send
Download Image
33 Likes
हुआ
है
तुझ
से
बिछड़ने
के
बाद
ये
मालूम
कि
तू
नहीं
था
तेरे
साथ
एक
दुनिया
थी
Ahmad Faraz
Send
Download Image
42 Likes
अपनी
दुनिया
भी
चल
पड़े
शायद
इक
रुका
फ़ैसला
किया
जाए
Madan Mohan Danish
Send
Download Image
22 Likes
जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
Send
Download Image
25 Likes
ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
Read Full
ARahman Ansari
Send
Download Image
13 Likes
जहाँ
तक
आके
तुम
वापस
गए
हो
वहाँ
अब
तक
कोई
पहुँचा
नहीं
है
Zubair Ali Tabish
Send
Download Image
47 Likes
मैं
सुख़न
में
हूँ
उस
जगह
कि
जहाँ
साँस
लेना
भी
शा'इरी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
59 Likes
सिर्फ़
ज़िंदा
रहने
को
ज़िंदगी
नहीं
कहते
कुछ
ग़म-ए-मोहब्बत
हो
कुछ
ग़म-ए-जहाँ
यारो
Himayat Ali Shayar
Send
Download Image
42 Likes
Read More
लगाना
ज़र्ब
जब
दिल
पर
तो
ज़ालिम
याद
ये
रखना
इसी
दिल
में
तुम्हारी
ज़ात
की
तौक़ीर
होती
है
Javed Aslam
Send
Download Image
2 Likes
जो
ज़मीं
ख़ुद
कभी
न
हो
साकित
उस
ज़मीं
पर
फ़राग़
क्यूँ
ढूँढूँ
Javed Aslam
Send
Download Image
2 Likes
घर
हमारी
वजह
से
कई
बस
गए
मेरे
हिस्से
में
ख़ाली
मकाँ
रह
गया
Javed Aslam
Send
Download Image
3 Likes
यह
मुझे
मेरी
मुहब्बत
का
सिला
देती
है
मेरी
तन्हाई
मुझे
ख़ुद
से
मिला
देती
है
Javed Aslam
Send
Download Image
2 Likes
रूहें
तन्हा
कहाँ
निकलती
हैं
हसरतें
साथ
इन
के
चलती
हैं
आहटें
सोने
ही
नहीं
देतीं
यादें
छत
पर
मेरी
टहलती
हैं
तुम
चले
आओ
भी
तो
क्या
होगा
मुझ
से
ख़ुशियाँ
कहाँ
सँभलती
हैं
हक़
पर
बातिल
की
जीत
होती
है
नफ़रतें
प्यार
को
कुचलती
हैं
फ़ानी
दुनिया
में
फल
नहीं
मिलता
नेकियाँ
जन्नतों
में
फलती
हैं
Read Full
Javed Aslam
Download Image
3 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Sazaa Shayari
Maut Shayari
Paani Shayari
Revenge Shayari
Sooraj Shayari