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Javed Aslam
yah mujhe meri muhabbat ka sila deti hai
yah mujhe meri muhabbat ka sila deti hai | यह मुझे मेरी मुहब्बत का सिला देती है
- Javed Aslam
यह
मुझे
मेरी
मुहब्बत
का
सिला
देती
है
मेरी
तन्हाई
मुझे
ख़ुद
से
मिला
देती
है
- Javed Aslam
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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यूँँ
तो
रुस्वाई
ज़हर
है
लेकिन
इश्क़
में
जान
इसी
से
पड़ती
है
Fahmi Badayuni
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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फिर
वही
रोना
मुहब्बत
में
गिला
शिकवा
जहाँ
से
रस्म
है
बस
इसलिए
भी
तुम
को
साल-ए-नौ
मुबारक
Neeraj Neer
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इश्क़
के
रंग
में
ऐ
मेरे
यार
रंग
आया
फिर
आज
रंगों
का
तेहवार
रंग
हो
गुलाबी
या
हो
लाल
पीला
हरा
आ
लगा
दूँ
तुझे
भी
मैं
दो
चार
रंग
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Afzal Ali Afzal
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यानी
अब
उसकी
मुहब्बत
का
हलफ़
माँगूँ
मैं
यानी
अब
सुर्ख़
लबों
पे
मैं
सियाही
फेंकूँ
anupam shah
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पलट
कर
लौट
आने
में
मज़ा
भी
है
मुहब्बत
भी
बुलाकर
देख
लो
शायद
पलट
कर
लौट
आएँ
हम
Gaurav Singh
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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जँचने
लगा
है
दर्द
मुझे
आपका
दिया
बर्बाद
करने
वाले
ने
ही
आसरा
दिया
कल
पहली
बार
लड़ने
की
हिम्मत
नहीं
हुई
मुझको
किसी
के
प्यार
ने
बुजदिल
बना
दिया
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Kushal Dauneria
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कितना
झूठा
था
अपना
सच्चा
इश्क़
हिज्र
से
दोनों
ज़िंदा
बच
निकले
Prit
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एक
आईना-ए-बातिन
भी
हो
'असलम'
वरना
चेहरा-साज़ी
में
तो
माहिर
है
यहाँ
हर
इंसाँ
Javed Aslam
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सहरस
दो-पहर
फिर
सेह-पहर
तब
शाम-ओ-शब
होना
ये
रफ़्तारों
की
दुनिया
में
छिपी
आहिस्तगी
भी
है
Javed Aslam
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उसी
से
प्यार
है
जिस
से
हमें
नाराज़गी
भी
है
जहाँ
पर
बैर
होता
है
वहीं
वाबस्तगी
भी
है
Javed Aslam
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तुम
मुझे
आज़मा
के
तो
देखो
मुझ
सेे
तुम
दूर
जा
के
तो
देखो
तुम
हो
रौशन
मिरी
निगाहों
में
दीप
मेरा
बुझा
के
तो
देखो
तुम
मुझे
बे-वफ़ा
कहो
लेकिन
ख़ाना-ए-दिल
में
आ
के
तो
देखो
मैं
ही
मैं
आऊँगा
नज़र
हर-सू
दिल
की
महफ़िल
सजा
के
तो
देखो
हाल-ए-दिल
तुम
छुपा
न
पाओगे
तुम
ज़रा
मुस्कुरा
के
तो
देखो
ख़ुद
ख़ुदा
ही
हो
नाख़ुदा
जिसका
उसकी
कश्ती
डुबा
के
तो
देखो
आँधियों
का
न
बस
चला
'असलम'
साहिलों
तुम
डरा
के
तो
देखो
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Javed Aslam
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मुझ
को
अक्सर
क़यास
होता
है
वो
मिरे
आस
पास
होता
है
ख़ुशबुएँ
पेश-पेश
होती
हैं
आने
वाला
जो
ख़ास
होता
है
वो
चला
जाता
है
तो
जाने
क्यूँ
शहर
सारा
उदास
होता
है
हर
कोई
आदमी
नहीं
होता
आदमी
ग़म-शनास
होता
है
रूठ
जाता
हूँ
आदतन
'असलम'
वो
मना
लेगा
आस
होता
है
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Javed Aslam
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