dozakhi saaton ke | दोज़ख़ी साअतों के

  - Jameel ur Rahman
दोज़ख़ीसाअतोंके
सभीख़्वाबआसेबबनकर
मिरेदिलसेलिपटेहुएहैं
मिरीरूहअनजानेहाथोंमेंजकड़ीहुईहै
मुझे,मुझसेलेलो
कियेज़िंदगी
उनअज़ाबोंकीमीरासहै
लम्हालम्हाजोमेरालहूपीरहेहैं
ज़मानोंसेमैंमरचुकाहूँमगरअन-गिनत
वहशीइफ़रीत
मेरेलहूकीतवानाईपरआजभीपलरहेहैं
  - Jameel ur Rahman
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