phir ek daagh charaagh-e-safar banaate hue | फिर एक दाग़ चराग़-ए-सफ़र बनाते हुए

  - Jaleel 'Aali'
फिरएकदाग़चराग़-ए-सफ़रबनातेहुए
निकलपड़ेहैंनईरह-गुज़रबनातेहुए
वोजस्तभरकेहवाहोगयामगरखुला
मैंकिसनवाहमेंथाउसकेपरबनातेहुए
निकलसकीकोईऔरसूरत-ए-तस्वीर
बहाएअश्कबहुतचश्म-ए-तरबनातेहुए
वोक़हरबरहमी-ए-बख़्तहैकिडरतेहैं
गिरालेंकहींदीवारदरबनातेहुए
क़दमक़दमपेसज़ादेरहाहैवक़्तहमें
हमारेऐबउदूकेहुनरबनातेहुए
तोज़िंदगीकोजिएँक्यूँँज़िंदगीकीतरह
कहींपेफूलकहींपरशररबनातेहुए
  - Jaleel 'Aali'
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