ghuroor-e-koh ke hote niyaaz-e-kaah rakhte hain | ग़ुरूर-ए-कोह के होते नियाज़-ए-काह रखते हैं

  - Jaleel 'Aali'
ग़ुरूर-ए-कोहकेहोतेनियाज़-ए-काहरखतेहैं
तिरेहम-राहरहनेकोक़दमकोताहरखतेहैं
अँधेरोंमेंभीगुमहोतीनहींसम्त-ए-सफ़रअपनी
निगाहोंमेंफ़िरोज़ाँइकशबीह-ए-माहरखतेहैं
येदुनियाक्याहमेंअपनीडगरपरलेकेजाएगी
हमअपनेसाथभीमर्ज़ीकीरस्म-ओ-राहरखतेहैं
वोदीवार-ए-अनाकीओटकिसकिसआगजलताहै
दिलदीदाकोसबअहवालसेआगाहरखतेहैं
दर-ओ-बसत-ए-जहाँमेंदेखतेहैंसक़्मकुछ'आली'
औरअपनीसोचकाइकनक़्शा-ए-इस्लाहरखतेहैं
  - Jaleel 'Aali'
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