ye shab o roz jo ik be-kali rakkhi hui hai | ये शब ओ रोज़ जो इक बे-कली रक्खी हुई है

  - Jaleel 'Aali'
येशबरोज़जोइकबे-कलीरक्खीहुईहै
जानेकिसहुस्नकीदीवानगीरक्खीहुईहै
वोजोइकमौज-ऐ-मोहब्बततिरेरुख़परझलकी
आँखमेंआजभीउसकीनमीरक्खीहुईहै
वक़्तदेताहैजोपहचानतोयेदेखताहै
किसनेकिसदर्दमेंदिलकीख़ुशीरक्खीहुईहै
आतीरहतीहैंअजबअक्ससदाकीलहरें
मेरेहिस्सेकीकहींशा'इरीरक्खीहुईहै
दश्तकीचुपसेउभरतीहैंसदाएँक्याक्या
बहरकेशोरमेंक्याख़ामुशीरक्खीहुईहै
कोईधुनहैपस-ए-इज़हारसफ़रमेंजिसने
मेरीग़ज़लोंकीफ़ज़ाऔरसीरक्खीहुईहै
कमकहाऔरसुझायाहैज़्यादा'आली'
एकइकसत्रमेंइकअन-कहीरक्खीहुईहै
  - Jaleel 'Aali'
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy