गुज़रगयाजोमिरेदिलपेसानेहाबनकर
उतरगयावोमिरीरूहमेंख़ुदाबनकर
तिराख़यालशब-ए-हिज्रफैलताहीगया
हज़ाररंगकीसोचोंकासिलसिलाबनकर
वफ़ाकेसंगसेटकराकेएहतिजाज-ए-अना
सलीब-ए-लबपेसिसकनेलगादु'आबनकर
बदनकेदश्तमेंमनकीहसीनसुब्होंको
निकलरहाहैग़म-ए-दहरअज़दहाबनकर
कभीतोदीपजलेंगुलखिलेंफ़ज़ामहके
कभीतोआशब-ए-वीराँमेंरतजगाबनकर
तमामउम्रजिसेढूँडतेरहे'आ'ली'
कहींमिलाभीअगरवोतोफ़ासलाबनकर