KHaamosh hain lab aur aankhoñ se aañsu hain ki paiham bahte hain | ख़ामोश हैं लब और आँखों से आँसू हैं कि पैहम बहते हैं

  - Jalaluddin Akbar
ख़ामोशहैंलबऔरआँखोंसेआँसूहैंकिपैहमबहतेहैं
हमसामनेउनकेबैठेहैंऔरक़िस्सा-ए-फ़ुर्क़तकहतेहैं
अबहुस्न-ओ-इश्क़मेंफ़र्क़नहींअबदोनोंकीइकहालतहै
मैंउनकोदेखतारहताहूँवोमुझकोदेखतेरहतेहैं
उनकीवोहयावोख़ामोशीअपनीवोमोहब्बतकीनज़रें
वोसुननेकोसबकुछसुनतेहैंहमकहनेकोसबकुछकहतेहैं
इसशौक़-ए-फ़रावाँकीयारबआख़िरकोईहदभीहैकिनहीं
इंकारकरेंवोयावा'दाहमरास्तादेखतेरहतेहैं
हमदर्दनहींहमराज़नहींकिससेकहिएक्यूँँकरकहिए
जोदिलपेगुज़रतीरहतीहैजोजानपेसद
मेंसहतेहैं
देखकिज़ालिमफ़ुर्क़तमेंक्याहालमिराबेहालहुआ
आहोंसेशरारेझड़तेहैंआँखोंसेदरियाबहतेहैं
'अकबर'शायददिलखोबैठेवोजलसेवोअहबाबनहीं
तन्हाख़ामोशसेफिरतेहैंहरवक़्तउदाससेरहतेहैं
  - Jalaluddin Akbar
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